राजस्थान के बूंदी जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां अवैध खनन के चलते एक ऐतिहासिक तालाब की दीवार को ब्लास्टिंग से उड़ा दिया गया। इस घटना ने न सिर्फ विरासत को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण पर भी बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है।
जिले के नमाना क्षेत्र के गरड़दा गांव के पास स्थित रियासकालीन रामबाग तालाब एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह बेहद चिंताजनक है। अवैध खननकर्ताओं ने तालाब की मजबूत पाल में छेद कर विस्फोटक से ब्लास्टिंग कर दी, जिससे करीब 15 से 30 फीट तक दीवार क्षतिग्रस्त हो गई।
यह तालाब करीब 10 से 15 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है और बरसात के दौरान जल संग्रहण का महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। इतना ही नहीं, यह तालाब आसपास के क्षेत्रों और चूड़ियों की पुल तक पानी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। गर्मी के दिनों में यह जंगली जानवरों के लिए भी पानी का प्रमुख साधन है।
ग्रामीणों का कहना है कि रियासतकाल में बनी यह दीवार बेहद मजबूत थी और वर्षों तक इसमें कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन हाल ही में खननकर्ताओं ने दीवार के नीचे मौजूद पत्थरों को निकालने के लालच में यह खतरनाक कदम उठाया।
ग्रामीणों का गुस्सा
जैसे ही ग्रामीणों को ब्लास्टिंग की भनक लगी, वे मौके की ओर दौड़े, लेकिन तब तक आरोपी मौके से फरार हो चुका था। घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश है और लोग आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई
लोइचा पंचायत प्रशासक रामरतन भील ने बताया कि यह मामला गंभीर है और आरोपी के खिलाफ नमाना थाने में शुक्रवार को रिपोर्ट दर्ज करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह तालाब रियासतकालीन धरोहर है और जल संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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खनिज विभाग भी आया हरकत में
मामले की गंभीरता को देखते हुए खनिज विभाग खंड द्वितीय के एमई सहदेव सहारण ने भी तुरंत एक्शन लेते हुए फारेमेन को मौका रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है। फोरमैन ईशा अवार्ड ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और नुकसान का आंकलन किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दीवार में छेद कर विस्फोटक सामग्री से ब्लास्टिंग की गई थी। लेकिन विस्फोटकर्ताओं की पहचान स्पष्ट नहीं हो पाई है।



