बूंदी। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर सौ मीटर और उससे अधिक ऊँचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली मानने की शर्त के विरोध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम राष्ट्रपति सचिवालय में बुधवार को याचिका दायर की गई। यह याचिका राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक एवं बूंदी के कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा द्वारा प्रस्तुत की गई है। साथ ही इस विषय में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
याचिका में अरावली पर्वतमाला को आधे भारत की जीवन रेखा बताते हुए कहा गया है कि भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा, राजस्थान एवं अन्य राज्यों में केवल 100 मीटर और उससे अधिक ऊँचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली पर्वतमाला मानने की रिपोर्ट प्रस्तुत करना तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे स्वीकार किया जाना पर्यावरण और भावी मानव जीवन के हितों के विपरीत है।
संशोधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मांग
राष्ट्रपति के नाम दायर याचिका में मांग की गई है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की जिस समिति ने यह सिफारिश की है, उसके स्थान पर एक नई उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए। यह समिति अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के संदर्भ में ऊँचाई जैसी अव्यवहारिक शर्तों को हटाकर पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सुप्रीम कोर्ट में संशोधित रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
जैव विविधता पर खतरे की चेतावनी
चर्मेश शर्मा ने याचिका में कहा है कि अरावली पर्वतमाला को लेकर मनमाने निर्णयों से भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो सकता है तथा जैव विविधता के नष्ट होने का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि अरावली के संरक्षित दायरे की परिभाषा ऊँचाई या दूरी के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखकर तय की जानी चाहिए।
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याचिका में राष्ट्रपति से इस गंभीर विषय पर हस्तक्षेप कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है, ताकि अरावली पर्वतमाला का समुचित संरक्षण सुनिश्चित हो सके।



