नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि आगामी जनगणना में नागरिकों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें मकान, परिवार, सुविधाएं, डिजिटल कनेक्टिविटी और वाहन जैसी अहम जानकारियां शामिल होंगी। जनगणना दो फेज में पूरी की जाएगी और यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी।
सरकार के अनुसार, जनगणना के दौरान परिवार के मुखिया को अपने परिवार से जुड़ी सभी जानकारियां देनी होंगी। इसमें मकान की स्थिति, पेयजल, शौचालय, रसोई, ईंधन, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और परिवार में रहने वाले सदस्यों की संख्या तक शामिल है।
जनगणना में पूछे जाएंगे ये 33 सवाल
जनगणना फॉर्म में मकान और परिवार से जुड़े बुनियादी से लेकर आधुनिक सुविधाओं तक के सवाल शामिल किए गए हैं। इनमें मकान का नंबर, फर्श-दीवार-छत में प्रयुक्त सामग्री, मकान का उपयोग व स्थिति, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, सामाजिक श्रेणी, कमरों की संख्या, पेयजल व बिजली का स्रोत, शौचालय व स्नानगृह, रसोई व एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, ईंधन, रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, मोबाइल फोन, दोपहिया व चारपहिया वाहन, उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज और मोबाइल नंबर (केवल जनगणना सूचना के लिए) शामिल हैं।
दो फेज में होगी जनगणना प्रक्रिया
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी—
पहला फेज: 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक, जिसमें घरों की लिस्टिंग और हाउसिंग डेटा जुटाया जाएगा।
दूसरा फेज: फरवरी 2027 से, जिसमें देश की आबादी की वास्तविक गिनती होगी।
पहले फेज से 15 दिन पहले सेल्फ एन्यूमरेशन यानी खुद से जानकारी भरने का विकल्प भी लोगों को मिलेगा।
पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
इस बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। लगभग 30 लाख कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा जुटाएंगे। एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले ऐप, ऑनलाइन पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से यह प्रक्रिया लगभग पेपरलेस होगी।
खास बात यह है कि आजादी के बाद पहली बार जाति आधारित गणना भी डिजिटल माध्यम से की जाएगी। इससे पहले 1931 में अंग्रेजी शासन के दौरान जाति जनगणना हुई थी।
हर घर बनेगा ‘डिजी डॉट’, मिलेंगे 5 बड़े फायदे
जनगणना के दौरान हर घर को मैप पर जियो-टैग कर ‘डिजी डॉट’ के रूप में दर्शाया जाएगा, जिससे कई बड़े फायदे होंगे—
आपदा में सटीक राहत: बाढ़, भूकंप या बादल फटने जैसी आपदाओं में यह मैप राहत और बचाव कार्यों को तेज और सटीक बनाएगा।
परिसीमन में मदद: लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में डिजिटल मैप अहम भूमिका निभाएगा।
शहरी प्लानिंग आसान: स्कूल, अस्पताल, सड़क और पार्क जैसी सुविधाओं की योजना बेहतर ढंग से बनाई जा सकेगी।
शहरीकरण और पलायन का सटीक डेटा: आने वाले वर्षों में शहरीकरण और माइग्रेशन के रुझानों की तुलना आसान होगी।
वोटर लिस्ट से डुप्लीकेट नाम हटेंगे: आधार और जियो-टैगिंग से मतदाता सूची अधिक सटीक बनेगी।
यह भी पढ़ें –अरावली संरक्षण को लेकर राष्ट्रपति के नाम याचिका दायर, 100 मीटर ऊँचाई की शर्त हटाने की मांग
क्यों अहम है जनगणना 2027
जनगणना 2021 कोरोना महामारी के कारण टाल दी गई थी, जिसे अब 2027 में पूरा किया जाएगा। पिछली जनगणना 2011 के अनुसार भारत की आबादी लगभग 121 करोड़ थी। जनगणना 2027 से सरकार को देश की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और डिजिटल स्थिति की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी, जो भविष्य की नीतियों और योजनाओं की आधारशिला बनेगी।





