बूंदी। राजस्थान के बूंदी जिले में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक पटवारी द्वारा जमीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन चढ़ाने के नाम पर रिश्वत मांगने का खुलासा हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में यह मामला पूरी तरह प्रमाणित पाया गया है।
मामले की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को हुई, जब सुमेरगंज मंडी निवासी लक्ष्मीचंद मीणा ने एसीबी को शिकायत दी। उन्होंने बताया कि उनकी खातेदारी जमीन के बंटवारे को राजस्व रिकॉर्ड में ऑनलाइन दर्ज कराने के लिए हल्का पटवारी रामकिशन मीणा ने 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। आरोप है कि आरोपी पहले ही 5 हजार रुपए ले चुका था और शेष राशि के लिए दबाव बना रहा था।
डिजिटल रिकॉर्डिंग में खुली पोल
एसीबी टीम ने शिकायत के बाद गोपनीय सत्यापन शुरू किया। डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर के जरिए हुई बातचीत में पटवारी द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि हो गई। रिकॉर्डिंग में साफ तौर पर 10 हजार रुपए की मांग और 5 हजार रुपए पहले लेने की बात सामने आई।
ट्रेप की तैयारी, लेकिन हर बार बच निकला आरोपी
एसीबी ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रेप की योजना बनाई। परिवादी को फिनाफ्थलीन पाउडर लगे 5 हजार रुपए देकर टीम ने कई बार जाल बिछाया, लेकिन पटवारी हर बार बहाने बनाकर मौके पर नहीं पहुंचा। कभी उसने फोन नहीं उठाया, तो कभी जयपुर में होने का हवाला दिया। अंततः आरोपी लंबी छुट्टी पर चला गया, जिससे ट्रेप कार्रवाई सफल नहीं हो सकी।
साक्ष्यों के आधार पर दर्ज हुआ मामला
हालांकि ट्रेप नहीं हो सका, लेकिन एसीबी ने डिजिटल रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत पटवारी रामकिशन मीणा के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच ACB के उप अधीक्षक पुलिस हरीश भारती को सौंपी गई है।
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परिवादी को लौटाई गई रिश्वत राशि
ट्रेप असफल रहने के बाद परिवादी ने एसीबी से अपनी राशि वापस लौटाने की मांग की। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर 5 हजार रुपए वापस लौटा दिए गए।
भ्रष्टाचार पर सख्त रुख
एसीबी अधिकारियों ने कहा कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भी दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।



