बूंदी। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बेगू निवासी 32 वर्षीय युवक राघव सोनी उर्फ राघवेंद्र की कनाडा में हुई मौत के 10 दिन बाद भी उनका शव भारत नहीं पहुंच पाया है। इस मामले को लेकर अब परिवार की पीड़ा गहराती जा रही है और मामला देश के उच्च स्तर तक पहुंच गया है।
जानकारी के अनुसार, 11 अप्रैल को कनाडा के टोरंटो जिले के ब्रमटोने शहर स्थित हर्ट लेक झील में नाव दुर्घटना के दौरान राघव सोनी की डूबने से मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद से अब तक उनका पार्थिव शरीर भारत नहीं लाया जा सका है, जिससे परिजनों के लिए एक-एक पल भारी पड़ रहा है।
राष्ट्रपति के नाम याचिका दायर
विदेशों में संकटग्रस्त भारतीयों की सहायता के लिए कार्य करने वाले बूंदी के कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा ने इस गंभीर मामले को लेकर द्रौपदी मुर्मू के नाम राष्ट्रपति सचिवालय में याचिका दायर की है। इसके साथ ही उन्होंने एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री के नाम नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में भी अधिकृत शिकायत दर्ज करवाई है।
परिवार के लिए बढ़ती जा रही परेशानी
राघव की असामयिक मृत्यु की खबर से परिवार पहले ही सदमे में है। ऐसे में 10 दिन बीत जाने के बाद भी शव भारत नहीं पहुंचने से परिजनों की व्यथा और बढ़ गई है। परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव का इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि राघव की बहन की सहेली का संबंध बूंदी से है, जिसके माध्यम से दस्तावेज जुटाकर यह मामला कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा तक पहुंचा। इसके बाद उन्होंने मामले में सक्रिय पहल करते हुए उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज करवाई।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप
चर्मेश शर्मा ने अपनी याचिका में कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार किसी भी देश में मृत्यु होने पर मृतक के शव को सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए परिजनों तक पहुंचाना उसका वैधानिक और मानवीय अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 दिन बीत जाने के बाद भी शव भारत नहीं भेजा जाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। उन्होंने भारत सरकार से कनाडा सरकार के साथ कूटनीतिक स्तर पर समन्वय कर जल्द से जल्द शव भारत भिजवाने की मांग की है।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला
यह मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंच गया है। चर्मेश शर्मा ने आयोग के अध्यक्ष के नाम शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि सम्मानजनक अंतिम संस्कार भी मानवाधिकारों के दायरे में आता है। उन्होंने आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।




