मजदूरों का तेजी से पलायन, यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़; टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर भी पड़ा बड़ा असर
सूरत। मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव और एलपीजी संकट का असर अब भारत के औद्योगिक शहरों में साफ नजर आने लगा है। इसका सबसे बड़ा असर सूरत में देखने को मिल रहा है, जहां मजदूरों का पलायन तेजी से बढ़ गया है।
रविवार को उधना रेलवे स्टेशन पर हजारों यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी। यूपी और बिहार जाने वाली ट्रेनों में सीट पाने के लिए लोगों में होड़ मच गई। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा, जिससे भगदड़ जैसे हालात बन गए।
लाइन तोड़ने पर बिगड़े हालात
सुबह करीब 11:30 बजे उधना-हसनपुर ट्रेन के लिए यात्रियों को कतार में खड़ा किया जा रहा था। इसी दौरान कुछ लोग लाइन तोड़कर आगे बढ़ने लगे। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस और आरपीएफ के जवानों ने लाठीचार्ज कर भीड़ को काबू में किया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यात्री पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए लोहे की जालियों को पार करते नजर आए, जिससे स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई।
21 हजार से ज्यादा यात्रियों को भेजा गया
रेलवे अधिकारी अनुभव सक्सेना के अनुसार, दोपहर तक 6 ट्रेनों के जरिए 21,000 से अधिक यात्रियों को रवाना किया जा चुका था। इसके बावजूद भीड़ लगातार बढ़ती रही, जिससे व्यवस्थाएं संभालना मुश्किल हो गया। उन्होंने बताया कि यात्रियों से बार-बार कतार में रहने की अपील की गई, लेकिन अव्यवस्था के चलते पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी।
एलपीजी संकट और गर्मी की छुट्टियां बनी वजह
स्टेशन पर भारी भीड़ के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं—एक तरफ समर वेकेशन के चलते यात्रियों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर एलपीजी संकट के कारण उद्योगों में काम प्रभावित होने से मजदूरों का पलायन तेज हो गया है। पिछले एक-दो महीनों से लगातार कामगार अपने गृह राज्यों की ओर लौट रहे हैं, जिससे रेलवे स्टेशनों पर दबाव बढ़ गया है।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर गहरा असर
एलपीजी संकट का सीधा असर सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। जानकारी के मुताबिक करीब 30% यानी लगभग 3 लाख मजदूर शहर छोड़ चुके हैं। इससे उत्पादन घटकर 6.5 करोड़ मीटर प्रतिदिन से घटकर 4.5 करोड़ मीटर रह गया है। इंडस्ट्री को रोजाना करीब 15,000 गैस सिलेंडर की जरूरत होती है, लेकिन सप्लाई प्रभावित होने से उत्पादन पर असर पड़ा है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो और अधिक मजदूरों के पलायन और उद्योग को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
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रेलवे ने बढ़ाई व्यवस्थाएं, फिर भी चुनौती बरकरार
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। अधिकारी के अनुसार, लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, लेकिन भीड़ इतनी अधिक है कि व्यवस्थाएं चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं।





