रूस में मृत हितेंद्र गरासिया के मामले में सामने आया भारत सरकार का अमानवीय चेहरा- चर्मेश शर्मा

-3 दिसंबर को शव दफन होने के बाद भी हाईकोर्ट में सुनवायी में झूठ बोलती रही सरकार 
-और अब शव नहीं लाने में दोषी बता दिया 6 माह से आंसू बहा रहा परिवार
-जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी, बीकानेर हाउस में भी चर्चा
-तीन दिसंबर को शव दफनाने में बड़ा रहस्य, सच सामने आया तो भूचाल आ जायेगा 
 
रूस में मृत हितेंद्र गरासिया के मामले में सामने आया भारत सरकार का अमानवीय चेहरा

उदयपुर । पिछले छह माह से रूस में मृत उदयपुर जिले के गोड़वा निवासी भारतीय नागरिक हितेंद्र गरासिया के शव की लंबे संघर्ष के बाद भारत आने की आस जगी है।लेकिन बुधवार 12 जनवरी को जोधपुर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से दिये गये  जवाब ने दोनों देशों की सरकारों की अमानवीय गलती को छिपाते हुये उल्टे हितेंद्र गरासिया के गरीब परिवार पर ही उसका शव लेने में रुचि नहीं दिखाने का आरोप लगा दिया और उसके शव को रूस में दफनाने को सही ठहराने की कोशिश की। बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से उपस्थित एडीशनल सॉलीसीटर जनरल आरपी रस्तोगी ने  कहा कि हितेंद्र गरासिया के परिवार ने रूस से शव लाने में रुचि नहीं दिखायी इसलिये शव को रूस में दफना दिया गया।

चारों सुनवायी में अलग जवाब से ही खुल गयी भारत सरकार की पोल
रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान सप्ताह भर के जंतर मंतर पर आंदोलन के बाद पीड़ित परिवार ने कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा की सहायता से जोधपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 8 दिसंबर को सुनवायी के दौरान उच्च न्यायालय ने हितेंद्र गरासिया के मामले को मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा हुआ गंभीर मामला बताते हुए भारत सरकार को सम्मानजनक अंतिम संस्कार करवाने के निर्देश दिये थे। अगली सुनवायी 15 दिसंबर को भारत सरकार ने हाईकोर्ट में जवाब दिया कि शव एफएसएल जांच के लिये रूस की जांच एजेंसी के पास रखा हुआ है। 20 दिसंबर को हाईकोर्ट ने हितेंद्र के शव को रूस में दफनाने में भारत सरकार   के सहमति देने पर रोक लगा दी। इस दिन भी भारत सरकार की ओर से कहा गया कि शव रूस की जाँच एजेंसी के पास ही है। 4 जनवरी को सुनवायी के दौरान भारत सरकार ने स्वीकार किया कि हितेंद्र के शव को रूस में दफना दिया गया है। लेकिन भारत सरकार ने शव को दफनाने की तिथि नहीं बतायी इसलिये बात दबी रह गयी। लेकिन जब बुधवार को भारत सरकार ने हाईकोर्ट में दफनाने की तिथि तीन दिसंबर बतायी और सब नहीं लाने का आरोप हितेंद्र के परिवार पर ही लगाया तो 20 दिसंबर तक हाईकोर्ट में हितेंद्र के शव के रूस की जांच एजेंसी के पास होने की बात कहने वाली  भारत सरकार ही कटघरे में आ गयी। अब सवाल उठ रहा है कि जब शव 3 दिसंबर को ही दफना दिया गया था तो चार बार हाईकोर्ट में सुनवायी के दौरान भारत सरकार क्यों झूठ बोलती रही।

भारत सरकार के जवाब से परिवार आहत
गत दिनों भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा हितेंद्र गरासिया की मृत्यु की सूचना 6 दिन तक परिजनों से छुपाने की बात सामने आने के बाद परिवार पहले ही दुरूखी था लेकिन भारत सरकार व रूस सरकार द्वारा अमानवीय लापरवाही कर शव को दफनाने के बावजूद इसके लिये हितेंद्र के परिवार को गलत तरीके से  जिम्मेदार ठहराने से परिवार बुरी तरह आहत हुआ है। हितेंद्र गरासिया की बेटी उर्वशी गरासिया ने कहा कि भारत सरकार पूरी तरह से अंधी और बहरी हो गयी है।हम कई बार  प्रधानमंत्री कार्यालय व विदेश मंत्रालय जाकर रूस से शव लाने का लिखित आग्रह कर चुके हैं। मेरे पिता के शव को भारत लाने की मुहिम चला रहे बूंदी के कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा की शिकायत पर राष्ट्रपति भवन व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक ने  विदेश मंत्रालय को कार्यवाही के निर्देश दे रखे हैं। फिर भी भारत सरकार अपनी गलती छुपाने के लिए हमारे परिवार पर झूठे व निराधार आरोप लगा रही है।

एक गलती को छुपाने में सौ गलतियां हो रही
हितेंद्र गरासिया की दिवंगत देह को सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए रूस से भारत लाने की मुहिम चला रहे कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा ने कहा कि अभी हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता यह है कि पहले एक बार दिवंगत देह भारत आ जाये।हाईकोर्ट में भारत सरकार द्वारा पीड़ित परिवार पर आरोप लगाने को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुये कहा कि भारत सरकार को एक प्रतिशत भी इच्छा नहीं होते हुये भी मजबूरी में हितेंद्र का शव रूस से भारत लाना पड़ रहा है इसलिये सरकार बौखला गयी है। सरकार से एक गलती को छिपाने लिये सौ गलतियां हो रही है। उन्होंने कहा कि जल्दी ही तीन दिसंबर को हितेंद्र का शव रूस में दफनाने का ऐसा रहस्य सामने आयेगा कि भूचाल आ जायेगा और सभी के पैरों तले जमीन खिसक जायेगी ।

जंतर मंतर पर आंदोलन जारी, बीकानेर हाउस भी पहुंचे
हितेंद्र गरासिया के शव को रुस से वापस लाने की मांग को लेकर बुधवार से जंतर मंतर पर शुरू हुआ अनिश्चितकालीन आंदोलन गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। गुरुवार को हितेंद्र गरासिया के पुत्र पीयूष गरासिया, कांग्रेस के प्रवासी सहायता प्रभारी चर्मेश शर्मा,गयासुद्दीन भट्टी अंकित कुमार आदि दिल्ली जंतर मंतर पर दूसरे दिन भी प्रदर्शन किया। वही शर्मा बाद में प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली बीकानेर हाउस स्थित राजस्थान सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव आवासीय आयुक्त कार्यालय पर भी पहुंचे और हितेंद्र के शव के रूस से भारत आने के बाद की स्थिति पर चर्चा की। उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने जहां भारत सरकार को तीन दिन में हितेंद्र का शव भारत लाने के निर्देश दिए थे वही नई दिल्ली बीकानेर हाउस कार्यालय में बैठने वाले राजस्थान सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव आवासीय आयुक्त को शव को परिजनों को सुपुर्द करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।