राजस्थान के इस गांव में ज्यादातर युवा है कुंवारे,पक्की सड़क नहीं होने की वजह से लोग बेटी ब्याहने से कतराते

 
इस गांव में पक्की सड़क नहीं होने की वजह से यहां के ज्यादातर युवा है कुंवारे

उदयपुर। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर मूर डूंगरी गांव उदयपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आता है। दो सौ परिवारों के इस गांव के लिए जाना होता हो तो अहमदाबाद हाइवे से जावर तक वाहन सुविधा उपलब्ध है. लेकिन आगे का सफर पहाड़ी ऊबड़-खाबड़ रास्ते से पैदल ही करना पड़ता है।

देश भर में आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर आजादी के अमृत महोत्सव  के आयोजन किये जा रहे हैं। भले हीं उदयपुर शहर स्मार्ट सिटी की ओर अग्रसर है और विश्व के पर्यटन नक्शे में अपनी जगह बना चुका है, किन्तु मूर डूंगरी के लोग आज भी पक्की सड़क जैसी मुलभूत सुविधाओं से भी तरस रहे है। पक्की सड़क के अभाव में इस गांव में लोग बेटी ब्याहने से भी कतराते हैं, जिसके चलते ज्यादातर युवा यहां कुंवारे हैं। 

बारापाल तहसील की सरुफला ग्राम पंचायत के मूर डूंगरी के लोगों की एक और मुसीबत है, वह यहां किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क नहीं पकड़ता। जिसके चलते जब कभी यहां का कोई भी व्यक्ति बीमार हो जाता या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना होता है तो उसे खटिया पर डालकर पैदल ही पांच किलोमीटर का सफर तय करना होता है। तब जाकर उसे पक्की सड़क मिल पाती है। मोबाइल नेटवर्क के अभाव में यहां के लोग अपनों से भी संपर्क नहीं कर पाते। ये दो बड़ी वजह हैं कि यहां आसपास के गांव के लोग भी अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहते। जिसके चलते इस गांव के ज्यादातर युवाओं की शादी नहीं होती। शादी के लिए पहली शर्त होती है कि वह इस गांव की जगह दूसरी जगह बसे।

सरूफला के उप सरपंच मोती लाल का कहना हैं कि देश को आजाद हुए साढ़े सात दशक हो गए, लेकिन यहां पक्की सड़क नहीं बनी। विधानसभा तथा जिला परिषद चुनाव के दौरान यहां के लोगों से सभी प्रत्याशी पक्की सड़क का वादा करते हैं, लेकिन बाद में कोई मुड़कर नहीं देखता। यहां के बुजुर्ग ओमप्रकाश नामा का कहना है कि ग्रामीणों ने मिलकर पहाड़ी को तोड़कर कच्ची सड़क बना ली लेकिन कभी किसी भी सरकार का सहयोग नहीं मिला। इसी के चलते आसपास गांव के लोग अपनी बेटी भी यहां ब्याहना नहीं चाहते। इसी के चलते ज्यादातर युवा यहां कुंवारे हैं। बुजुर्ग महिला दाखीबाई ठेठ मेवाड़ी में बताती हैं कि हादी से सबै नटे जाएं यानी यहां के युवाओं की शादी करने से सभी लोग इन्कार कर देते हैं।

राज्य सरकार की चिकित्सा सुविधा को लेकर जारी किसी भी योजना का लाभ यहां की जनता को नहीं मिल पाता। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। बाहर मजदूरी करने वाले कुछ लोगों के पास मोबाइल है, लेकिन परिजनों से बात नहीं हो पाती। जब कभी किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना होता है तो खाट पर पीड़ित को लिटाकर चार व्यक्ति उठाते हैं और पांच किलोमीटर तक पैदल लेकर जाते हैं, तब जाकर पक्की सड़क आती है। दिन की बजाय रात में यह सफर बेहद डरावना और मुश्किल हो जाता है। पंद्रह किलोमीटर के बाद चिकित्सा सुविधा मिल पाती है।

मूर डूंगरी में सरकारी स्कूल नहीं है। एक हजार से अधिक आबादी के बावजूद वहां सरकारी स्कूल नहीं खोला गया। निकटतम स्कूल सरूफला में है, जो यहां से लगभग तीन किलोमीटर दूर है। इसके चलते लोग अपने बच्चों को वहां पढ़ने नहीं भेजते। तेंदुआ विचरण क्षेत्र होने से कोई भी ग्रामीण रिस्क नहीं लेता।

विधायक फुल सिंह मीना का कहना है कि वह मूंर डूंगरी गांव के लोगों की समस्या से वह परिचित हैं। पक्की सड़क के निर्माण के लिए वह प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री सड़क योजना से इस गांव को जोड़ने के लिए प्रस्ताव भेजा है।