लापरवाही या गैरजिम्मेदारी? एनएच 116 पर आवारा गौवंश पशुओं का आतंक-राहगीर परेशान-कभी भी हो सकती हैं सड़क दुर्घटनाएं

-टोल प्रबन्धन व कार्मिक भी नहीं है गंभीर? 
 
 
एनएच 116 पर आवारा गौवंश पशुओं का आतंक

टोंक/उनियारा,(शिवराज मीना/मुजम्मिल सारण)। जिले के उनियारा उपखण्ड क्षेत्र में एन.एच. 116 पर स्थित गुमानपुरा टोल प्लाजा प्रबन्धन कम्पनी की लापरवाही, अनदेखी तथा उदासीनता के चलते हुए आवारा गौवंश पशुओं का आतंक दिनों दिन लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। जिसके कारण कभी भी एन.एच. 116 पर आवारा गौवंश पशु सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन जाते है। 

इस समस्या को लेकर टोल प्लाजा कम्पनी तथा प्रशासन बेखबर होकर मौन साधे बैठे हुए हैं। रोड़ पर घूम रहे आवारा गौवंश पशुओं के कारण हर रोज बेकसूर जिंदगियां मौत के मुंह में जाते-जाते बची जा रही है। निराश्रित गोवंश पशु भी साधनों से टकराकर दुर्घटनाओं को जन्म देते हैं, क्योंकि वाहन चालक वाहन चलाने के दौरान सड़क पर घूम रहे आवारा पशुओं को बचाने के चक्कर में किसी दूसरे वाहन या व्यक्ति से जाकर भिड़ जाते हैं। इस दौरान सड़क दुर्घटना में किसी की ना किसी की मृत्यु या घायल हो जाते है। समस्या किसी एक व्यक्ति की नहीं है। आवारा गौवंश पशुओं से कई व्यक्ति और वाहन चालक शिकार हो चुके हैं तथा संभावनाएं लगातार बढती ही जा रही है।

 वहीं कभी-कभी तो वाहन दुर्घटना में स्वयं आवारा पशु भी मौत के घाट उतर जाते हैं। उनियारा उपखण्ड क्षेत्र में हाईवे की यह एक जटिल समस्या काफी समय से चली आ रही है। जिसका अभी तक कोई समुचित समाधान नहीं हुआ है। अब तो हालात यहां तक पहुंच गये है कि आवारा घूम रहे निराश्रित गौवंश पशु राहगीरों को हर रोज मारकर घायल कर देते हैं। 

गौरतलब है कि इन निराश्रित गौवंश पशुओं में अधिकतर बुढी बीमार तथा दूध नहीं देने वाली गाय या नंदी सांड होते हैं। अतः इनका उपयोग नहीं होने के कारण इन्हें खुला छोड़ दिया जाता है।इतना सब कुछ होने के बावजूद भी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है। जिसका खामियाजा वाहन चालकों, राहगीरों व गौवंश पशुओं को भुगतना पड़ रहा है।