थाई एप्पल बैर की खेती कर चन्दवाड गांव का किसान मोजीराम मीणा बना क्षेत्र में प्रेरणा का स्त्रोत

 
किसान मोजीराम मीणा

टोंक/दूनी, (शिवराज मीना/हरीशंकर माली)। जिले के दूनी तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत चन्दवाड़ के एक किसान ने परंपरागत खेती को छोड़कर नई तकनीकी की खेती को अपना कर अपनी आय को बढ़ाने की दृष्टि से अपने खेत में थाई एप्पल बेर के सैकड़ों पौधे लगाकर नई तकनीकी खेती करने के तरीके को अपना कर क्षेत्र में प्रेरणा का स्त्रोत बना हुआ है।

 दूनी तहसील क्षेत्र के चन्दवाड गांव निवासी किसान मोजीराम मीणा ने बताया कि गरीबी हालत के चलते उनके पास जमीन बहुत कम थी, जिस पर वह परंपरागत तरीके से खेती कर फसलें बोते आ रहा था। जिससे उसकी आय में कमी होने लगी। कम जमीन होने तथा पानी व सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था नहीं होने से भी कृषि से काफी नुकसान होने लगा। कई मुसीबतों का सामना करने के बाद उसने कृषि बागवानी मिशन से जानकारी लेकर अपने खेत में थाई एप्पल बेर की खेती करने की योजना बनाई तथा कृषि बागवानी विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों से सलाह लेकर परंपरागत कृषि तरीके को छोड़कर नया तरीका अपनाया। जिससे अब बेर के पौधे काफी विकसित हो गये हैं। गत वर्ष भी 6 माह में ही काफी बैर आए थे, वहीं इस साल भी बेर की फसल से काफी अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद है, जो दिसंबर-जनवरी माह में बेर की फसल पककर तैयार हो जाएगी। जिससे आमदनी भी बढ़ेगी तथा कृषि करने में होने वाले कई तरह के खर्चों से भी मुक्ति मिली हैै।

 साथ ही इस बेर के बगीचे को देखकर अन्य कई किसान भी इस तरह की तकनीकी अपनाएंगे तो निश्चय ही उन्हें भी अच्छा मुनाफा होगा। अपनी अच्छी आमदनी बढ़ेगी और क्षेत्र में गांव में पहचान भी बनेगी। किसान मोजीराम मीणा ने बताया कि यह अच्छी क्वालिटी के पौधे हैं जो मुझे अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद है। क्योंकि जब उसने पौधे लगाए थे तो 6 महीने बाद ही इनके बेर आने शुरू हो गये थे जो इन पौधों को लगाए 2 साल हो गये है।  इस साल तो पौधे भी अच्छी तरह विकसित हो गये है । जिससे मुझे काफी अच्छी इनकम होने की उम्मीद है और मैं दूसरे किसानों से भी कहना चाहता हूँ कि आसपास के अन्य किसान भी परंपरागत कृषि को छोड़कर नए तकनीकी की कृषि को अपनाये, ताकि इस तरह की फसल से अच्छी आय होगी। जिससे आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी, किसान आर्थिक संकटों से उभरेगा।  इतना ही नहीं आसपास क्षेेेत्र व राह चलते लोग भी किसान मोजीराम से बेर की खेती के बारे में जानकारी लेने से नहीं चूकते हैं, जिससे गांव का यह गरीब किसान आज आसपास के गांव में भी प्रेरणा की मिसाल बना हुआ है।