बनेठा बनास नदी क्षेत्र से रात-दिन खुलेआम हो रहा अवैध बजरी का खनन व परिवहन- जिम्मेदार मौन

- बनेठा आइए-एन्ट्री दीजिए-बेरोकटोक बजरी भरकर ले जाइए...
- अवैध बजरी के वाहन आमजन व राहगीरों के लिये बन रहे मुसीबत, बढ़ रही घटना-दुर्घटना
 
 
Illegal gravel mining and transportation is being done openly night and day from Banetha Banas river area - responsible silence

टोंक/उनियारा, (शिवराज बारवाल/बाबूलाल मीना)। भले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिले के बनेठा बनास नदी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन व परिवहन (Illegal gravel mining and transportation) को लेकर पर रोक लगी हो। लेकिन इन सबके बावजूद भी टोंक जिले में बनास नदी क्षेत्र से अवैध रूप से बजरी का अवैध खनन व परिवहन (Illegal mining and transportation of gravel illegally from Banas river area in Tonk district) थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिला स्तर सहित उपखण्ड स्तर पर भी प्रशासन की गठित एसआईटी टीम अवैध खनन-परिवहन रोकथाम को लेकर गम्भीर नहीं है। 

पुलिस प्रशासन, खनिज व वन विभाग नियमित रूप से अवैध बजरी रोकथाम की कार्यवाही को लेकर चाहे कितने भी दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही नजर आती है। बजरी माफियाओं और पुलिस प्रशासन व वन विभाग के कार्मिकों के बीच भी कथित  मिलीभगत के मामले सामने आने से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। अवैध रूप से बजरी खनन-परिवहन के वाहनों से अब तक जिलेभर में कई दर्जनों हादसों में कई राहगीर व आमजन सहित बजरी माफिया खुद हादसे का शिकार हो चुके है तथा अपनी जान तक भी गंवा चुके हैं। लेकिन इन सबके बावजूद भी टोंक जिले का पुलिस प्रशासन, खनिज व वन विभाग गम्भीर नजर नहीं आ रहा है। जिले के बनेठा थाना क्षेत्र की बात करें तो रात-दिन खुलेआम बड़े पैमाने पर सैकड़ों वाहनों द्वारा अवैध खनन एवं परिवहन किया जा रहा है। यहाँ तक की पुलिस थानों व पुलिस चौकियों के बाहर से भी बजरी का अवैध रूप से परिवहन होने के नजारे खुलेआम देखे जा सकते है। अब इसे जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों व कार्मिकों की अनदेखी कहें, लापरवाही या मिलीभगत। 

उनियारा उपखण्ड की बात करे तो बनेड़ा सहित अलीगढ़, सोप, नगरफोर्ट, उनियारा थाना क्षेत्र से सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित ट्रक व डम्परों से अवैध खनन-परिवहन के नजारे खुलेआम रात-दिन बनास नदी व गांवों कस्बों से परिवहन करते देखे जा सकते है। बजरी के वाहनों की तेज गति व ओवरलोडिंग के कारण अब तक जिले व उपखण्ड क्षेत्र में दर्जनों सडक हादसे हो चुके हैं। लेकिन उसके बावजूद भी जिला प्रशासन व स्थानीय क्षेत्रीय प्रशासन द्वारा आज दिन तक बजरी परिवहन माफियाओं के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई हैं। जिससे क्षेेत्र में अवैध बजरी व पत्थर खनन-परिवहन एक प्रकार से कैंसर रूपी बीमारी का रूप धारण कर चुके है। जब पुलिस व खनिज विभाग द्वारा अभियान चलाकर कभी-कभार अवैध बजरी खनन-परिवहन की कार्यवाही के मामले दिखाने होते है तो ये बडे माफियाओं की तो मिलीभगत से उन पर कोई कार्यवाही नहीं करते, बजाय उल्टे बड़े बजरी माफियाओं के इशारे पर छोटे स्तर के एकाद बजरी परिवहन वालों के खिलाफ ही कार्यवाही करते नजर आते है। ऐसे में बजरी माफियाओं के भी अलग-अलग गिरोह गुट सक्रिय हैं। 

जबकि नियमित रूप से अवैध बजरी खनन कर परिवहन करने वाले बडे माफियाओं के खिलाफ कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की जाती है। जिसके ताजा उदाहरण क्षेेत्र में खुलेआम रात-दिन खुलेआम देखे जा सकते है। इन सब गोरखधंधों का सारा खेल आमजन को जरूर नजर आता है, लेकिन जिम्मेदारों को माफियाओं के यह गोरखधंधे शायद नजर नहीं आते है। अवैध खनन-परिवहन की सूचना व हादसों के बाद भी पुलिस व जिम्मेदार अक्सर समय से मौके पर नहीं पहुंचते है। जब माफिया अवैध परिवहन कर या घटना कारित कर निकल जाते है, उसके बाद महज खानापूर्ति पर गश्त के रूप में पुलिस की गाडी व वन विभाग वाले दिखावे तरीके से घूमते नजर आते है। 

पुलिस, खनिज व वन विभाग की मिलीभगत के चलते माफिया तंत्र इतना मजबूत है कि पुलिस गश्त व कार्यवाही पर निकलते ही रैंकी कर्ताओं व पुलिसकर्मियों द्वारा सूचना तुरन्त माफियाओं तक पहुंच जाती है। कुछ पुलिसकर्मी तो इतने भ्रष्ट है कि वे अपनी वर्दी का फर्ज भूलकर चन्द रूपयो की बन्दी व चौथवसूली के लालच में खुलेआम माफियाओं की चाकरी करते नजर आते है। 

ज्ञातव्य रहे, कि पूर्व में भी अवैध बजरी परिवहन को लेकर बनेठा थाना पुलिस के ऊपर गाज गिर चुकी है, उसके बावजूद भी पुलिस द्वारा कोई सबक नहीं लिया जा रहा है। लेकिन बडे माफियाओं व राजनीतिक नेताओं का संरक्षण मिलने से उनके खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं हो पाती है। जिससे माफिया व रैकीकर्ता पहले से ही सावधान होकर अपने वाहनों को निकालने व छुपाने में कामयाब हो जाते है। अब देखना यह है कि क्षेत्र की पुलिस, वन व खनिज विभाग व गठित एसआईटी इन माफियाओं के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्यवाही कर पाते हैं।