सवाई माधोपुर कलेक्ट्रेट की सुरक्षा रात में रामभरोसे-खुले पड़े रहते हैं दोनों द्वार

 -सुरक्षा में नहीं होता एक भी सुरक्षाकर्मी, नहीं है प्रशासनिक अधिकारियों का कोई ध्यान 
 
 कलेक्ट्रेट की सुरक्षा रात में रामभरोसे-खुले पड़े रहते हैं दोनों द्वार

टोंक/सवाईमाधोपुर,(शिवराज मीना)। सवाईमाधोपुर जिला व प्रशासनिक मुख्यालय कलक्ट्रेट की सुरक्षा दिन तो दिन, रात में भी रामभरोसे रहती हैं, परिसर के दो मुख्य द्वार हैं। रात में दोनों ही खुले पड़े रहते हैं और तो ओर इन पर रात में एक भी सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं होता हैं। इस बाबत हिन्दुस्तान शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व दिल्ली हाईकोर्ट के एडवोकेट राजेन्द्रसिंह तोमर उर्फ राजा भैया ने स्वयं रात को लिए गये छाया चित्र सहित श्रीमान ज़िला जज, ज़िला कलेक्टर व जिला पुलिस अधीक्षक महोदय को लिखित शिकायते भी की हैं।

राजा भैया ने अपने द्वारा की गई शिकायत की प्रतियाँ और परिसर के छाया चित्र देते हुए मीडिया को बताया की बुधवार-गुरूवार रात वो रात लगभग सवा ग्यारह बजे दिल्ली से सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन पर आए और पैदल ही कलेक्ट्रेट के पीछे स्थित अपने निवास गणेशनगर-बी जा रहे थे। जब वह कलेक्ट्रेट गेटों के पास से होकर गुजरे तो उन्होंने देखा की परिसर के दोनों मुख्य द्वार खुले पड़े थे और तो ओर इन पर कोई सुरक्षाकर्मी भी तैनात नहीं था। जबकि ज़िला न्यायालय के दोनों द्वार बंद थे।

राजा भैया ने बताया की कलेक्टरी परिसर में ड़ीएम, एसपी, एडीएम, एएसपी, एसड़ीएम, ड़ीएसपी आदि सहित अधिकारियों के कार्यालय तथा ज़िला कंज़्यूमर कोर्ट, परिवार न्यायालय, पोक्सो न्यायालय व उनके रिकार्ड रूम के साथ-साथ अधिवक्ताओं के चौम्बर और सीटें भी हैं। दिन में भी इस परिसर के दोनों गेटों पर कोई सुरक्षा का इंतज़ाम नहीं होता। वे रोक टोक कोई भी कही भी आता जाता रहता हैं, पर रात के समय ज़िला कलेक्ट्रेट की इस तराह की लापरवाही और सुरक्षा में चूक समझ से परे हैं।

अति संवेदनशील परिसर होने के बावजूद भी यहाँ की सुरक्षा रात में सिर्फ़ राम भरोसे रहती हैं, जो कि कभी भी किसी बड़ी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकती हैं और जिसकी भरपाई भी करना शायद मुश्किल होगा। शिकायत में उन्होंने तत्काल इस परिसर की सुरक्षा चाक चौबंद करने सहित यहाँ दिन और रात में गेटों पर हथियार बंद सुरक्षाकर्मी तैनात करने व आवश्यकता ना होने पर रात को दोनों गेट बंद रखने बाबत प्रशासन के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा हैं।

बड़ी अजीब बात यह हैं कि यहाँ के किसी भी छोटे बड़े अधिकारी का ध्यान इस ओर नहीं गया, जबकि कहने को आए दिन पुलिस व प्रशासन के छोटे-बड़े अधिकारी बारी-बारी से रात में ग़स्त करते रहते हैं। ये सोचनीय विषय हैं कि वो खुद अपने ही मुख्य परिसर की सुरक्षा चूक नहीं देख पाए।