सवाईमाधोपुर : भांजी ने निभाया बेटे का फर्ज, मामा की चिता को दी मुखाग्नि, ग्रामीणों ने दिया अर्थी को कंधा

 
भांजी ने निभाया बेटे का फर्ज, मामा की चिता को दी मुखाग्नि

 सवाईमाधोपुर/मित्रपुरा,(राकेश चौधरी)। भारतीय संस्कृति की परंपरा के अनुसार किसी की मृत्यु होने पर मुखाग्नि मृतक का बेटा, भाई, भतीजा, पति या पिता ही देता है। कोई मा, बेटी, बहन, या पत्नी किसी का तारण कर सकती है या नही इसको लेकर कई तर्क वितर्क दिए जाते हैं एक वो जमाना था। जब श्मशान घाट पर महिलाओं को जाने की अनुमति नही दी जाती थी लेकिन समय के अनुसार अब बदलाव आ रहा है। 

 ऐसे ही गुरुवार को मामा को भांजी ने मुखाग्नि देकर एक मिसाल पेश कर दी। मित्रपुरा तहसील क्षेत्र के ग्राम बपुई में प्रजापत समाज का एकमात्र परिवार था जिसमे परिवार के मुखिया भुरजी का आकस्मिक निधन बुधवार रात हो गया। जिसको कंधा देने के लिए परिवार में एक बहन और भांजी के अलावा कोई नही था। जिसके बाद कस्बेवासियों ने मानवता दिखाते हुए मृतक भुरजी की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट तक पहुचाया। 

वही समाज सेवक बलराम मीना ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतक भुरजी की भांजी ने मामा के बेटा न होने पर मामा के शव को मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया। भांजी के द्वारा किये गए इस मुख्य कार्य की बपुई कस्बे सहित पूरे क्षेत्र में भांजी की प्रशंसा की जा रही है।और ग्रामवासियों द्वारा पूरी विधिविधान से अंतिम संस्कार किया गया।

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मानवता जीवित है। इसका प्रमाण गुरूवार को बपुई ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने पेश की है। गौरतलब है कि बुधवार रात बपुई ग्राम पंचायत निवासी भुर्जी प्रजापत की आकस्मिक मृत्यु हो गयी थी जिसके बाद उसके परिवार में कोई मौजूद नही था जिसके बाद ग्रामीणों ने मानवता दिखाते हुए  70 वर्षीय मृतक भुरजी की अर्थी कन्धा देकर मानवता की मिसाल पेश की है।