लखीमपुर खीरी कांड:- देखते रह गये अशोक गहलोत, सचिन पायलट मार गये बाज़ी; जाने पूरा मामला

 
sachin pilot
लखीमपुर खीरी की घटना पर जहां बीजेपी- कांग्रेस में एक - दूसरे को घेरने में लगी है। वहीं इस घटना के पीछे चल रही राजनीति में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान का असर भी देखने को मिल रहा है। क्योंकि इस घटना के बाद प्रियंका और राहुल गांधी यूपी के सियासी मैदान में कूद गए हैं।

वहीं, दूसरे राज्यों के नेता भी आलाकमान से नजदीकी दिखाने के लिए यूपी पहुंच रहे हैं। बड़ी बात यह है कि बुधवार को राहुल गांधी के प्रस्तावित लखनऊ दौरे में उनके साथ जाने वाले नेताओं की लिस्ट में ऐसे नेताओं के नाम है, जो अपने - अपने प्रदेश में सियासी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। इनमें दो प्रमुख नाम के रूप में सचिन पायलट और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यूपी सरकार से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद छत्तीसगढ़ सीएम भूपेश बघेल लखनऊ पहुंच गए थे।

जबकि टीएस सिंहदेव रायपुर में बैठकर सिर्फ ट्वीट करते रहे। इसी क्रम में राजस्थान की राजनीति को भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें अशोक गहलोत ने एआईसीसी के आवहान के बाद जयपुर से ही सीएम गहलोत ने मोदी सरकार पर हमला बोला। लेकिन सचिन पायलट खुद राहुल गांधी के साथ मौके पर जाने के लिए तैयार है।

उल्लेखनीय है कि पंजाब में परिवर्तन के बाद से ही लगातार यह कयास लगाया जा रहे थे कि सचिन पायलट को आलाकमान जल्द ही मुख्यमंत्री पद सौंपेगा। लेकिन इस चर्चा पर तब विराम लग गया जब अशोक गहलोत ने इशारों- इशारों में गांधी जंयती के कार्यक्रम पर यह साफ कर दिया कि वहीं आगे प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे।हालांकि सूत्रों की मानें, तो फिलहाल आलाकमान ने राजस्थान में परिवर्तन करने की मंशा को टाल दिया है। पार्टी पहले पूरी तरह से पंजाब के स्थिति सामान्य कर देना चाहती है, उसके बाद राजस्थान पर फोकस किया जा सकता है।

जानकारों की मानें, तो पिछले कुछ समय से लगातार सचिन पायलट दिल्ली आलाकमान के संपर्क में है। उन्हें पार्टी की छवि मजबूत करने के लिए कांग्रेस राजस्थान से लेकर देश के कई राज्यों में पार्टी इस्तेमाल कर रही है। सचिन पायलट बीते कुछ दिनों में बेंगलुरू, देहरादून और इसके बाद मुंबई (महाराष्ट्र) दौरे पर थे। वहीं आज बुधवार को दोबारा टोंक जाने का उनका कार्यक्रम तय था। लेकिन लखीमपुर हिंसा के बाद उन्होंने टोंक दौरा रद्द करके राहुल गांधी के लखनऊ जाने का फैसला किया।

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के साथ सचिन पायलट के जाने के मामले को लेकर राजनीतिक चश्में से भी देखा जा रहा है। राजनीति के जानकार कह रहे है कि यहां अशोक गहलोत पायलट से मात खा गए और सचिन पायलट ने दांव चल दिया है। राहुल - प्रियंका गांधी का लखीमपुर घटना पर समर्थन करने का लाभ उन्हें भविष्य में मिल सकता है।