बाल संस्कार जागरूकता के तहत मोटिवेशनल कार्यक्रम, कोटा के शिक्षा विद डॉ ज़फ़र मोहम्मद करेगें अगुवाई

 
डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद

 कोटा। बालसंस्कार जागरूकता के लिए तरुण युवाओं के साथ लगातार मोटिवेशनल कार्यक्रम शुरू करने जा रहे है। डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद जो शिक्षाविद भी है, समाजसेवक भी है। राजनितिक गतिविधियों सहित कई प्रदेश, राष्ट्रीय स्तरीय कार्यक्रमों से जुड़े है।

उनका कहना है कि इन दिनों बच्चों में राष्ट्र के प्रति सम्मान, ईमानदारी और अपनों से उम्र में बढे लोगों के साथ उनके बर्ताव के हालातों में यांत्रिक तरीके से बदलाव हुआ। यह आने वाले समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। डॉक्टर ज़फ़र का मानना है की बच्चे अगर बेहतर संस्कारवान होंगे तो समाज और देश की व्यापक सोच भी होगी और संस्कार भी बेहतर होंगे, एक आदर्श समाज स्थापित होगा।

डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद अपनी इसी व्यापक सोच के तहत प्रगति इंटरनेशल ग्रुप की तरफ से कोटा सहित राज्य के प्रमुख क्षेत्रों में बाल संस्कार मोटिवेशनल कार्यक्रमों की शुरुआत करने जा रहे है। डॉक्टर ज़फ़र कहते है बच्चे मन के सच्चे होते है उनका खाली दिमाग होता है जो प्रिंटेबल होता है, उनके दिमाग में जो समझा दिया, जो लिख दिया जाए, जो बिठा दिया जाये, उसे ही संस्कार समझ कर वोह अपने जीवन में व्यवहार में, सब कुछ वैसा ही करने लगते हैं। लेकिन इन दिनों भागमभाग की इस दुनिया में सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मिडिया सहित सभी मंचो पर इस मामले में कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई जगह पारिवारिक विवाद है तो आर्थिक तंगी, पड़ोसियों के कार्यव्यवहार, दुनिया की चमक दमक का लालच बच्चों के मन को भटका रहा है। आज से बीस साल कहो या इसके पहले भी कहो,तब और आज के बाल संस्कारों, व्यवहार में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ हो गया जो चिंता का और चिंतन का विषय बन गया है। इस मामले में समाज के हर नागरिक को, सरकारों को  समाजसेवी संगठनों को, ईमानदारी से विचार भी करना होगा और प्रयास भी करना होंगे।

डॉक्टर ज़फ़र ने इस मामले शीघ्र ही बाल मनोवैज्ञानिकों, बालकों में आदर्श समझे जाने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों, सेलेब्रिटीज़, बालकल्याण समिति सदस्यों, मनोवैज्ञानिकों, संस्कारवान परिजनों, शिक्षकों, बालकल्याण आयोग, बाल अधिकारिता मंत्रालय सहित सभी तरह के विशेषज्ञों के ज़रिये, स्कूली अबोध नाबालिग बच्चों को, बाल संस्कार मोटिवेशनल कार्यक्रम चलाये जायेंगे। जिसके लिए बच्चों को एकत्रित कर मोटिवेशनल संस्कारवान कार्यक्रमों के तहत उनके कार्यव्यवहार में क्या बुरा है क्या अच्छा है, उम्र में बढ़ों से किस तरह सम्मान के साथ व्यवहार होना चाहिए, खुद के परिजनों, रिश्तेदारों, भाई, बहनों में किस तरह का व्यवहार आचरण होना चाहिए, इस मामले में उन्हें बहुपक्षीय वैज्ञानिक व्यवस्थाओं को शामिल कर मोटिवेट किया जाएगा। डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद कहते है कि उन्होंने जो सोचा है वोह करेंगे। अगर मेरी इस कोशिश में शामिल बच्चों में से कुछ एक प्रतिशत बच्चों में भी में यह सब बाल संस्कार मोटिवेशनल व्यवस्था कर पाया तो में खुद को समाज, देश के प्रति आभारी समझूंगा।

डॉक्टर मोहम्मद ज़फर यूँ तो किसी भी परिचय के मोहताज नहीं, वह खुद प्राइमरी शिक्षक से लेकर सेकेंडरी, हायर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षक रहे है, वह बीएड होल्डर होने के नाते खुद भी बाल मनोविज्ञान के ज्ञाता है। बच्चों के साथ उनके कार्यव्यवहार का उन्हें बढ़ा अनुभव है। खुद संस्कारवान, एकजुट परिवार संस्कार के सकारात्मक उदाहरण है , डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद कई समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े है, सरकार से जुडी कई समितियों में सदस्य रहे है, सड़कों सेमिनारों, बैठकों में बाल मनोविज्ञान पर मोटिवेशनल कार्यक्रमों में शामिल हुए है। पीएचडी की डॉक्टरेट उपाधि के बाद डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद खुद का प्रगति इंटरनेशनल ग्रुप बनाकर शैक्षणिक क्षेत्र में अव्वल है। हिंदी, इंग्लिश मीडियम के स्कूल संचालित है। बीएड, एसटीसी के कॉलेज है। हर साल इनके स्कूल से कई छात्र छात्राएं मेरिट में अव्वल रहते है। प्रतिभावान बच्चों की कामयाबी इनका लक्ष्य है।

डॉक्टर ज़फ़र मोहमद कई बार इनके कॉलेज, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की आर्थिक स्थिति और उनके पढ़ने की जुस्तजू को देखते हुए, खुद की जेब से भी फीस वगेरा चुकता कर उसे शैक्षणिक क्षेत्र में अव्वल कर देते हैं। डॉक्टर ज़फ़र मोहम्मद की इस ऊँची सोच को सलाम। सेल्यूट के साथ अल्लाह से, खुदा से, वाहेगुरु से, महावीर स्वामी से, जीसस से सभी से, दुआ है कि अल्लाह उन्हें उनकी इस मुहीम में  कामयाब करे। उनकी इस वैचारिक गंभीरता को, केंद्र, राज्य सरकार, समाजसेवी संगठन बारीकी से समझें और बदलते माहौल में जो बाल संस्कारों में बदलाव कहें या फिर सीधे गिरावट कहे आयी है, उसमे सुधार कार्यक्रमों की सभी शुरुआत करे, ताकि बच्चों के आपराधिक मन, आपराधिक स्थिति, सामाजिक अराजक बदलाव से, इस समाज, इस देश को,बचाकर फिर से संस्कारवान, चरित्रवान, आदर, सम्मान का केंद्रबिंदु बनाया जा सके।