पट्टा बनाने के लिए 9 हजार की रिश्वत लेते एसीबी ने निगम संविदा कर्मी को किया ट्रैप

 
पट्टा बनाने के लिए 9 हजार की रिश्वत लेते एसीबी ने संविदा कर्मी को किया ट्रैप

कोटा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों ग्रामीण की टीम ने कार्यवाही करते हुए निगम के संविदा कर्मी, ई मित्र संचालक को 9 हजार की रिश्वत लेते ट्रैप किया है। संविदा कर्मी नरेंद्र निर्भीक ने पट्टे बनाने की एवज में 12 हजार की रिश्वत की डिमांड की थी जिसका सौदा 9 हजार में तय हुआ था। संविदाकर्मी निर्भीक को रिश्वत की रकम 9 हजार रूपये लेते नगर निगम की छत से एसीबी ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

एसीबी की एडिशनल एसपी प्रेरणा शेखावत ने बताया कि परिवादी महिला कोटड़ी निवासी राधा गुप्ता ने शिकायत दी थी कि उसके पति की मौत हो चुकी है एवं कोटडी इलाके में उसका एक मकान है। जिसका वह पट्टा बनवाना चाहती थी। वह कई दिनों से निगम के चक्कर लगा रही थी लेकिन निर्भीक उसे कागजी कार्यवाही की कहकर टाल रहा था। बाद में उसने कहा कि वो पट्टा बनवा कर दे देगा लेकिन 12 हजार रुपये लगेंगे। जिसके बाद महिला ने बताया कि उसके पास इतने रुपए नहीं है। तो आरोपी काम को अटकाने के लिए बहाने बनाकर टालता रहा।

परिवादी राधा गुप्ता ने देहात एसीबी टीम को इसकी शिकायत दी थी। जिस पर कोटा एसीबी की टीम ने सत्यापन करवाया जिसमे 9 हजार में सौदा तय हुआ। जिस पर रिश्वत की रकम लेने के लिए संविदाकर्मी नरेंद्र ने महिला को नगर निगम की छत पर बुलाया था। जहां से एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के साथ और कौन कौन इस खेल में शामिल है इस बारे में एसीबी पड़ताल कर रही है। साथ ही उसने और किस किस से पैसे मांगे पड़ताल की जा रही है।
आरोपी नरेंद्र विज्ञान नगर का रहने वाला है। वह ई मित्र संचालक है, जिसे वर्तमान में निगम में प्रशासन शहरों के संग अभियान में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर ठेके पर रखा हुआ है। सबसे बड़ी बात ये है कि निगम परिसर में जहां अभियान के तहत काम हो रहा है वह एक हॉल है। वहां सभी अधिकारी कर्मचारी भी बैठते है। इसके बाद भी आरोपी रिश्वत का खेल चला रहा था।

परिवादी राधा ने बताया कि वह बार बार निगम के चक्कर काट रही थी लेकिन कागजी कार्यवाही के नाम पर नरेंद्र उसे उलझा रहा था। उसने 501 रुपए की रसीद भी कटवा ली। कागजी कार्यवाही के नाम पर एक हजार रुपये भी दे दिए। इसके बाद भी वह उसे 12 हजार रूपये की मांग कर रहा था। वह उसे कभी विज्ञान नगर बुलाता तो कभी निगम के दफ्तर। महिला का कहना है कि जब सरकार ही 501 में पट्टा देने की बात कह रही है तो वह क्यों इतने पैसे दे, इसलिए उसने एसीबी में शिकायत दी।