लोगों का दर्द समझते हैं, इसलिए दया का भाव समझा रजनीश ने, दो माह में चार बार एसडीपी की, मरीजों की सेवा ही जीवन के संस्कार

 
Understand the pain of people, so Rajneesh understood the feeling of mercy, did SDP four times in two months, service of patients is the rite of life

कोटा, (विशाल उपाध्याय)। कोटा में लगातार एसडीपी के लिए लोग परेशान हो रहे हैं (People are continuously getting worried for SDP in Kota), कोई सा भी ब्लड ग्रुप हो मरीज के परिजन चिंतित हो उठते हैं, चाहे शहर हो या गांव सभी एसडीपी के लिए परेशान होते हैं, लेकिन इन मरीजों की समस्या का समाधान अपना ब्लड सेंटर पर हो जाता है। सोमवार रात को भी कॉमर्स के रिटायर्ड प्राचार्य प्रोफेंसर कपिल देव भी बेहद परेशान हुए। 

टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब के रीजन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता ने बताया कि कपिल देव की पत्नी बेला शर्मा की प्लेटलेट काउंट 9 हजार से कम होती जा रही थी। ऐसे में वह बेहद परेशान व व्याकुल थे, सभी जगह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने के बाद भी एसडीपी नहीं मिल रही थी, ऐसे में हमेशा की तरह ही टीम जीवनदाता, जीवदायनी बनकर आगे आई और अपना सिस्टम शुरू किया, लोगों को फोन कॉल किए, मैसेज भेजा, ऐसे में मेडिकल कॉलेज के डॉयलिसिस वार्ड के प्रभारी राजनीश खंडेलवाल को याद किया तो उन्हें अपने परिवार के साथ कहीं जाना था।

 लेकिन जब उन्हें पता चला की मरीज की प्लेटलेट काउंट 9 हजार रह गई तो वह इस पीडा को समझ गए और सभी कार्य छोडकर अपना ब्लड सेंटर पहुंचे और दो माह में चौथी बार ए पॉजिटिव एसडीपी डोनेट की। खंडेलवाल ने बताया कि वह डायलिसिस वार्ड में मरीजों की पीडा को रोज देखते हैं, ऐसे में उनकी सेवा को ही ध्येय बाना लिया है। संस्कार भी ऐसे ही हैं, ऐसे में सभी को मदद का भाव रखते हुए आगे आना चाहिए। उनके इस सेवाकार्य के सहयोग देने के लिए अतुल विजय,  महावीर और स्वम डॉ कपिल देव भी खुद मौजूद थे। उन्होंने मोती की माला पहनाकर अभिनंदन किया।