कोटा जिले की फैक्ट्रियों में नहीं है आग बुझाने के संयंत्र, नियमों को धता बता रही है फैक्ट्रियां!

- केमिकल फैक्ट्री में लगी आग, 6 दमकलों ने 2 घंटे में आग पर पाया काबू
 
Kota district district factories do not have fire extinguishing plants, factories defying the rules!

कोटा, (के.के. शर्मा "कमल")। कोटा के उद्योग नगर थाना इलाके में गुरुवार अलसुबह एक केमिकल फैक्ट्री में आग लग गई। जिसके चलते 30 लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है। गनीमत यह रही कि फैक्ट्री में उस समय कोई मजदूर नहीं था। दमकल की 4 गाड़ियों ने आधे घंटे में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।

कोटा शहर के उद्योग नगर इलाके में इंडस्ट्रियल एरिया में एरोमेटिक नामक केमिकल फैक्ट्री है।आग लगने से फैक्ट्री में रखा माल जलकर खाक हो गया बताया जा रहा है कि करीब तीस लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है वहीं फैक्ट्री मालिक के अनुसार पचास लाख से ज्यादा का नुकसान है।

आग अलसुबह लगी, सूचना मिलते ही दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंची और आधे घंटे की मशक्क्त के बाद आग पर काबू पाया आग अलसुबह लगी, सूचना मिलते ही दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंची और आधे घंटे की मशक्क्त के बाद आग पर काबू पाया जहां रुई से सैल्यूलोज पाउडर बनाया जाता है। फैक्ट्री में बुधवार को शट डाउन लिया था। इसके चलते फैक्ट्री में बुधवार से काम बंद था। गुरुवार तड़के फैक्ट्री में अचानक आग लग गई। अंदर केमिकल होने की वजह से आग तेजी से फैली और जल्द ही मशीनरी को चपेट में ले लिया। जब तक फैक्ट्री मालिक अजय गुप्ता को घटना की जानकारी लगी आग काफी फैल चुकी थी। सूचना मिलने पर दमकल की 4 गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए। अंदर काफी मात्रा में रुई थी जिससे की आग जल्दी फैली।

दमकल कर्मियों ने आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। आग लगने का प्रारंभिक कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। गनीमत यह रही कि फैक्ट्री में कोई भी मजदूर नहीं था और काम नहीं चल रहा था वरना कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था। फिलहाल आग की वजह से 30 लाख से ज्यादा का नुकसान होना बताया जा रहा है।

शहर में संचालित कई फैक्ट्रियों में नहीं है आग बुझाने की पर्याप्त सुविधाएं
शहर में विभिन्न इंडस्ट्रियल एरिया में चल रही कई फैक्ट्रियों में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है जिसके चलते ट्रैक्टरों में आग लगने की स्थिति में आग भयंकर विकराल रूप ले लेती है फैक्ट्रियों में नुकसान तो होता ही है साथ ही जान माल का नुकसान भी हो जाता है, यह तो गनीमत रही कि उस समय फैक्ट्री में मजदूर नहीं थे नहीं तो बड़ा जान माल का नुकसान हो सकता था इससे पूर्व भी तीन महीने पहले भी इस केमिकल फैक्ट्री में आग लगी थी मैं उस समय भी कई दिनों तक धुएं का गुबार निकलता रहा।

ना नियम ना कायदे
पर्यावरण प्रदूषण मंडल के द्वारा पर्यावरण शुद्धता का भी ध्यान रखने की दिशा निर्देश है तथा नियमावली बनी हुई है किंतु फैक्ट्री मालिकों के द्वारा ना नियमों का पालन किया जा रहा है ना ही कायदे से संबंधित निरीक्षण अधिकारी निरीक्षण रिपोर्ट बनाकर फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ कार्यवाही कर रहे है,ं जिसके चलते यह आगजनी की घटनाएं बढ़ रही है वहीं श्रमिकों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिन्ह लगा हुआ।

श्रम विभाग भी आंखें मूंदे
पर्यावरण प्रदूषण मंडल जहां चिर निद्रा में सो रहा है वही श्रम विभाग  आंखें मूंदे हुए हैं श्रमिकों की सुरक्षा एवं जाल माल से संबंधित उपकरणों के अभाव में कई फैक्ट्रियों में धुआंधार रूप से काम चल रहा है लेकिन श्रमिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।