चिकित्सकों के कार्य में बाधा उत्पन्न करने वालों पर सख्त कार्रवाई करे सरकार- डॉ. जायसवाल

- जोधपुर की घटना के बाद जिला कलक्टर को दिया ज्ञापन 
 
Government should take strict action against those who obstruct the work of doctors- Dr. Jaiswal

कोटा, के के शर्मा "कमल"। पिछले एक माह में ही राजस्थान के विभिन्न स्थानों जोधपुर, भीलवाड़ा, सादुलपुर, चूरू में चार ऐसी घटनाएं घटित हुई है जिसमें अत्यंत गंभीर रोगी की मृत्यु के साथ राज्य सरकार की हितकारी योजनाएं जैसे चिरंजीवी योजना को लेकर अनावश्यक विवाद उत्पन्न कर परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया साथ ही चिकित्सकों पर दबाव बनाकर उनसे जबरन वसूली की गई। कुछ समय पहले लालसोट में इस प्रकार की घटना से आहत होकर एक गोल्ड मेडलिस्ट महिला चिकित्सक डॉ अर्चना शर्मा ने आत्महत्या कर ली थी जिसकी वजह से पूरी चिकित्सा व्यवस्था ठप हो चुकी थी। 

ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो इसके लिए आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर यूनाइटेड प्राइवेट क्लिनिक एंड हॉस्पिटल्स एसोसिएशन ऑफ कोटा (उपचार) के अध्यक्ष संजय जायसवाल के नेतृत्व में जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया गया। डॉ. जायसवाल ने बताया कि लालसोट के प्रकरण के बाद ही राज्य सरकार ने ऐसी घटनाओं के संबंध में स्पष्ट एसओपी जारी की है, लेकिन बेहद अफसोस का विषय है कि इस एसओपी की पालना तो दूर की बात स्थानीय प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि मूक दर्शक बने रहते हैं और अस्पताल परिसर से भीड़ को हटाने या एसओपी को समझने का प्रयास तक नहीं करते। 

इस संबंध में पहले भी चिकित्सकों के सभी प्रतिष्ठित संगठनों ने लिखित, मौखिक, फोन कॉल सोशल मीडिया एवं उचित माध्यम से इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम के लिए ज्ञापन पत्र एवं अनुरोध पत्र प्रेषित किए परंतु अभी तक इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा कोई सहयोग प्राप्त नहीं हुआ है साथ ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति और ज्यादा होती ही जा रही है।

- इन घटनाओं से राज्य के चिकित्सकों में गहरा रोष
सचिव डॉ. अमित व्यास ने बताया कि इस प्रकार की घटनाओं से राज्य के चिकित्सक समुदाय में भारी रोष है एवं चिकित्सालय में परिस्थितियों एवं भय के माहौल में काम करने में गंभीर कठिनाई महसूस की जा रही है। विगत दिनों में जोधपुर के दो अस्पतालों में इसी प्रकार की घटनाएं हुई हैं, जिसमें राज्य सरकार द्वारा जारी एसओपी की पालना नहीं की गई। डॉ. केवल कृष्ण डंग ने कहा कि दोनो ही प्रकरणों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका दुर्भाग्यपूर्ण है। 

निजी अस्पतालों में इस प्रकार की घटनाएं एक तरह से व्यापार का दूसरा रूप ले चुकी है जिससे कुछ असामाजिक लोगों द्वारा चिकित्सकों को भीड़ जुटाकर धमकाना उसे जबरन वसूली करना मानसिक रूप से प्रताड़ित करना राजनीतिक दबाव बनाना इन सभी से एक चिकित्सक अपने ऊपर आश्रित मरीजों का उपचार अपने प्रोटोकॉल के हिसाब से करने में असमर्थ है। चिकित्सकों पर दबाव, उनसे पैसा वसूली करने वाले लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।