जबलपुर अग्निकांड के बाद भी नही चेता प्रशासन?, कोटा के निजी चिकित्सालय भीषण अग्निकांड के मुहाने पर.......

-जनहित में शहर प्रशासन करें कार्यवाही
-मरीजों व तीरमारदार आमजन की सुरक्षा के हो पुख्ता इंतजाम 
 
Even after the Jabalpur fire, the administration did not warn, Kota's private hospital at the mouth of the horrific fire.......

कोटा। कोटा शहर में स्थित निजी चिकित्सालय भी भीषण अग्निकांड के मुहाने पर हैं, अनगिनत एयर कंडीशनर, सड़क तक अतिक्रमण, ना सेटबैक छोड़ा हुआ, ना फायर ऑडिट, ना अग्निकांड से बचाव के उपाय, फिर भी जिला प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर संचालित हो रहे हैं निजी चिकित्सालय। ऐसे में जबलपुर जैसे अग्निकांड की संभावना जबरदस्त हैं किंतु प्रशासन आंखें मूंदे बैठा हुआ है ?।

विज्ञाननगर क्षेत्र में ही स्थित मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल का दंभ भरने वाले हॉस्पिटलो की हालत यह है कि सरकार की ओर से निर्धारित पट्टे के अतिरिक्त सड़क पर कब्जा कर आगे टीन सेट बनाकर सेटबैक की जगह को भी कवर करते हुए अतिक्रमण कर रखा है। वही सकड़े कमरे सकड़े जगह कमरों में अनगिनत एयर कंडीशनर के चलते कभी भी भीषण अग्निकांड हो सकता है। इसके लिए पर्याप्त रूप से सेटबैक भी नहीं छोड़ा गया है। अगर आग लग जाए तो सैकड़ों मरीजों की जान सांसत में आ सकती है लेकिन बेपरवाह प्रशासन के चलते हॉस्पिटलों का न फायर ऑडिट, ना फायर एनओसी, ना ही अतिक्रमण हटाने का अभियान। ऐसे में अग्नि कांड हो जाये तो उसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा?। यह यह प्रश्न बना हुआ है।

कोटा शहर के अधिकांश चिकित्सालय की हालत यही है, हॉस्पिटल की बात करें तो उसका दवा घर ही अतिक्रमण की जद में है, आगे टीन सेट किए हुए हैं, प्रथम मंजिल द्वितीय मंजिल तृतीय मंजिल पर अगर आग लग जाए तो वहां से उतरने के लिए तथा सकड़ी सीढीयों के अलावा कोई साधन नहीं है। सीढीयां भी इतनी सकरी है कि उसमें एक साथ उतर नहीं सकते, ऐसे में कोई अग्निकांड जैसी घटना हो तो सैकड़ों मरीजों की जान सांसत में आ सकती है।

अग्निशमन विभाग सिर्फ औपचारिकता भर
अग्निशमन विभाग को अधिकार है कि जिस भी चिकित्सालय या भवन में अग्निशमन की गाइड लाइन के अनुसार निर्धारित इक्विपमेंट या बाहर जाने के रास्ते उपलब्ध नहीं है तो वह उनको कुछ दिनों का नोटिस देकर खाली करवा कर उन्हें सीज कर सकता है। लेकिन लोगो कि माने तो अग्निशमन विभाग के द्वारा अब तक के इतिहास में एक भी चिकित्सालय को नोटिस देकर सीज नहीं किया गया है।

प्रशासन चाहे तो कोटा के कई निजी हॉस्पिटल के लग सकते हैं ताले!
कोटा शहर के कुछ निजी चिकित्सालय को छोड़कर अन्य चिकित्सालय नियमों में चाहे निर्माण की बात हा,े चाहे अग्निशमन की बात, चाहे सेटबैक की बात हां, चाहे नियमों के तहत संचालन की बात हो कोई भी चिकित्सालय नियमों में खरा नहीं उतर रहा है। हर चिकित्सालय के हालात यही है अतिक्रमण से अटे पड़े हैं, बाहर निकलने के लिए दरवाजे नहीं है इतना कन्जेस्टेड है की हल्की सी आपाधापी में ही लोग चलते-चलते गिर जाते हैं। ऐसे में जबलपुर जैसा अग्निकांड हो जाए तो सैकड़ों मरीजों व उनके तीरमारदारो की जान सांसत मे आ सकती है। जिला प्रशासन को अधिकार है कि वह मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले इन नियम विरुद्ध तथा मरीजों की जान जोखिम में डालने पर चिकित्सालय को नोटिस देकर उनके मरीजों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराकर चिकित्सालयों के ताले लगवा सकते हैं। नियमों में खरे नहीं होने के कारण इन्हें बंद करने से भी कोई कानून रोक नहीं सकता।

आवासीय परिसरों में कमर्शियल चिकित्सालय गतिविधियां अवैध
विषय विशेषज्ञ बताते हैं कि कोटा शहर में जितने भी हॉस्पिटल बने हुए हैं वह कमर्शियल एरिया में ना होकर आवासीय परिसर में बने हुए हैं जो पूर्ण रुप से अवैध है, आवासीय क्षेत्र में हॉस्पिटल नहीं होने चाहिए, लेकिन कोटा में तो हर गली कौने में निजी चिकित्सालय चलते दिखाई दे रहे हैं।

स्वायत शासन विभाग के परिपत्रों की भी पालना नहीं
निदेशक एवं संयुक्त सचिव स्वायत्त शासन विभाग तथा संयुक्त शासन सचिव प्रथम नगरीय विकास विभाग के पत्रांक पंचायत 17(7)नविवि/नियम 2020/दिनांक 31 जनवरी 2020 को जारी पत्र में काउंसिल आफ आर्किटेक्चर से पंजीकृत वास्तविक अग्निशमन सुरक्षा से संबंधित विषय विशेषज्ञों के माध्यम से तकनीकी परीक्षण में भवन का निरीक्षण कर अग्निशमन सुरक्षा की रिपोर्ट तैयार कर सक्षम अधिकारी को प्रस्तुत करने का प्रावधान है तथा फायर एनओसी के बाद प्रशासन विभाग द्वारा गठित एक्सपर्ट के पैनल के द्वारा अग्निशमन सुविधाओं की जांच तथा मॉक ड्रिल का प्रावधान है किंतु इनकी पालना अभी तक नहीं की गई है।

कोटा दक्षिण नगर निगम मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह राजोरा ने कहा कि शहर के निजी चिकित्सालयों को फायर एनओसी लेने के लिए नोटिस दिए हुए हैं, सभी को प्रवेश एवं निकास द्वार की पुख्ता व्यवस्था रखने तथा अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था रखने की दिशा निर्देश दिए हुए हैं।