रंग लाने लगा डिजिटल सत्याग्रह नीट एग्जाम देने वालों ने भेजी हजारों शिकायतें- सीईओ नितिन विजय

 
Digital Satyagraha started to bring color, thousands of complaints sent by those who gave NEET exam - CEO Nitin Vijay

कोटा। मोशन एजुकेशन की ओर से डिजिटल सत्याग्रह (Digital Satyagraha by Motion Education) के तहत नीट एग्जाम देने वाले हजारों विद्यार्थियों ने शिकायतें भेजी हैं। पेपर समय पर नहीं मिला, गलत भाषा में मिल गया, छात्राओं के साथ बर्ताव खराब रहा तो कहीं प्रशासनिक कारणों से विद्यार्थियों को परेशानी हुई...। इन सभी शिकायतों को लगातार कम्पाइल कर एनटीए और संबंधित अथॉरिटी को भेजा जा रहा है। 

मोशन के फाउंडर और सीईओ नितिन विजय (Nitin Vijay, Founder and CEO of Motion) ने बताया कि डिजिटल सत्याग्रह के आगाज के साथ पहले ही दिन दो लाख से अधिक विद्यार्थियों ने यू ट्यूब पर हमारे वीडियो को देख लिया। एक समय ऐसा था जब ट्वीटर पर भी डिजिटल सत्याग्रह का हमारा सन्देश सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहा था। कई शिक्षण संस्थान और जाने माने शिक्षक भी हमारे साथ आए हैं। 

श्रीगंगानगर के आर्मी पब्लिक स्कूल में हिन्दी माध्यम के 238 बच्चों को अंग्रेजी में प्रश्न पत्र दिए गए। इस कारण वे परीक्षा नहीं दे पाए। सांसद निहाल चन्द की ओर से  केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया को शिकायत के बाद केंद्र सरकार ने इस केंद्र पर हिंदी माध्यम की परीक्षा दोबारा आयोजित किए जाने पर सहमति दे दी है। जनप्रतिनिधियों की इस संवेदनशीलता के लिए भी हम आभारी हैं। उम्मीद है एनटीए सभी शिकायतों पर ध्यान देगा।

 ऐसे हुआ डिजिटल सत्याग्रह का आगाज
 विजय ने बताया कि नीट एग्जाम के बाद उनके पास एक छात्रा का फोन आया। वह रो रही थी। एग्जाम के दौरान एनटीए की गलतियों के कारण परेशान थी। इसके अलावा भी मीडिया में गड़बड़ियों की ओर भी कई खबरें आई। यह सब देख सुनकर बुरा लगा। मेरा मानना है कि मैं शिक्षा के क्षेत्र में हूँ तो शिद्द्त के साथ अपना काम करता रहूं, खुद को इम्प्रू करता रहूं और सिस्टम में सुधार करता रहूं। हम भी हजारों बच्चों की व्यवस्था बनाते हैं और जानता हूँ कि एनटीए के लिए देश-विदेश में 18 लाख से अधिक बच्चों का एग्जाम करवाना आसान टास्क नहीं है लेकिन यह भी सही है कि उसकी गलती की वजह से किसी बच्चे के जीवनभर के सपने पर पानी फिर सकता है। इस बार मुझे लगा कि केवल पढ़ाने से ही बात नहीं बनेगी। बच्चों के अधिकारों के लिए भी बात करनी पड़ेगी। मुझे लगा कभी-कभी अन्याय के खिलाफ न बोलना भी अन्याय का साथ देने जैसा होता है। अगर नहीं बोलूंगा तो एक शिक्षक के नाते मुझे जो गर्व का अहसास होता है, वह नहीं होगा। मैं उन बच्चों के साथ खड़ा रहना चाहता हूँ, जिनके साथ अन्याय हुआ है। 

कमियां रह गई वे दूर होनी चाहिए
देश में लोकतंत्र है और बहुमत की बात सुनी जाती है। इसलिए डिजिटल सत्याग्रह के तहत हम गूगल शीट का एक लिंक दे रहे हैं। जिन भी बच्चों के साथ गलत हुआ है-वे यहां अपना नाम, रोल नंबर, सेंटर और आपके साथ क्या गड़बड़ी हुई है, इसकी विस्तार से जानकारी दें। स्पष्ट करना चाहूंगा कि एनटीए के खिलाफ लड़ाई नहीं छेड़ना चाहता हूँ और न नीट का एग्जाम रद्द करने की मुहिम चला रहा हूँ। दरअसल इस बार जो गलतियां हुई, कमियां रह गई वे दूर होनी चाहिए।