झालावाड़ दरबार चंद्रजीत सिंह करेगें राजनीति में प्रवेश, थामेंगे कौनसी पार्टी का दामन, इसे रखा फिलहाल राज़

- वीरम देव समारोह में मिले जनसमर्थन से हुए उत्साहित
- 57 वर्ष बाद महराजा हरिशचंद्र के पौते चंद्रजीत सिंह उतर सकते हैं लोकसभा चुनावी मैदान में
- कौन सी पार्टी का थामेंगे दामन, अभी नहीं खोले पत्ते    
 
Jhalawar court Chandrajit Singh will enter politics, will hold which party, keep it a secret for the time being
झालावाड़, (राहुल राठौर)। झालावाड़ महाराजा हरिशचन्द्र के पौते चंद्रजीत सिंह (Chandrajit Singh, grandson of Jhalawar Maharaja Harishchandra) के बोलिया बुजर्ग में आयोजित वीरम देव समारोह में भाग लेने की खबर ग्रामीणों को मिली तो झालावाड़ से लेकर बोलिया बुजर्ग तक ग्रामीणों ने द्वारा बड़े जोश उत्साह से स्वागत किया। इस दोरान मिले आपार जन समर्थन (immense public support) को लेकर इनकी अपनी लोकप्रियता साबित कर दी है। 

वीरम देव समारोह में मोजूद लोगो एवं ग्रामीणों ने झालावाड़ जिले की आवाज दिल्ली तक पहुंचाने के लिए राजनीति में आने का आग्रह भी किया। लोगों की भावनाए एवं विश्वास से अभिभूत होकर आखिर 57 वर्ष के लम्बे अंतराल बाद महराजा हरिश्चंद्र के पौते चंद्रजीत लोकसभा चुनाव के मैदान में उतर सकते है। राजस्थान के झालावाड में चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई। झालावाड़ महराजा चंद्रजीत सिंह को लेकर भी कयास लगाए जा रहे थे जो हकीकत हो नजर आ रही है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भगवा झंडा उठायेगें  या पंजा के साथ खड़े होगे यह अभी भविष्य के गर्त में है। हालांकि महराजा राजनिति में प्रवेश जरूर करेगे, लेकिन कौनसी पार्टी का दामन थामेंगे इसको लेकर उन्होने अपने पत्ते नही खोले और कहां कि आने वाला समय बतायेगा।


उल्लेखनीय है कि झालावाड़ महाराजा हरिशचन्द्र ने सन 1954 राजनिति प्रवेश कर  विकास के कई आयाम स्थापित किए थे, सन 1957 मे पहला चुनाव डग विधान सभा क्षैत्र  से दूसरा चुनाव सन 1962 मे खानपुर विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था। सार्वजनिक निर्माण मंत्री, विधुत विभाग के मंत्री रहते हुए कई विकास कार्य करवाए।

झालावाड़ जिले को जिला बनाने में इनकी सम्पुर्ण भागीदारी रही, सरकार के पास जिला बनाने में बजट की कमी थी। इन्होने जिला स्तर के विभगों के किए राज परिवार की सम्पति गढ़ पैलेस सरकार को दान कर दी गई और सरकार ने कि उस गढ़ पेलेस में सभी जिला स्तर के कार्यलय खोल दिए। यही नहीं उन्होने मदन विलास कोठी,एतिहासिक लाइब्रेरी, भवानी क्रिकेट गाउण्ड भी सरकार को दान कर दी गई जो लोगो के कार्य आ रहा। मार्च 1967 में महराजा हरिश्चंद्र जी का देहान्त होने के बाद राज परिवार ने राजनीति से मोह भंग हो गया।