जमीन विवाद : साधु ने पेड़ पर लटक कर की आत्महत्या, सुसाइड नोट में विधायक पर लगाए गंभीर आरोप

 
Land dispute: Sadhu commits suicide by hanging on tree, serious allegations against MLA in suicide note

जालोर। जिले में 60 वर्षीय एक साधु ने पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली (Sadhu commits suicide by hanging from tree)। आत्महत्या के पीछे जमीनी विवाद (land dispute behind suicide) बताया जा रहा है। आश्रम के संतों ने भीनमाल से बीजेपी विधायक पूराराम चौधरी (BJP MLA from Bhinmal Puraram Choudhary) पर साधु को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।

रविनाथ नामक साधु ने गुरूवार मध्य रात्री को आत्महत्या की। उसके पास एक सुसाइड नोट भी मिलने की बात सामने आ रही है। इसमें साधु ने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुसाइड नोट से पता चलता है कि रविनाथ थोड़े बहुत ही पढ़े-लिखे थे। अपने नोट में उन्होंने बीजेपी विधायक के साथ जमीन विवाद का जिक्र किया है। उन्होंने यह भी अपील की कि उनके शव का पोस्टमॉर्टम नहीं किया जाए। 

वहीं, पुलिस पर सुसाइड नोट छिपाने का आरोप लगाते हुए संतों ने पेड़ पर लटके साधु के शव को उठाने से इनकार कर दिया। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी उन्हें समझाने की कोशिश करते रहे। पुलिस मामले कि तहकिकात करने में जुटी है।

बता दें कि घटना जालोर के राजपुरा गांव में सुंधा माता मंदिर की तलहटी के पास एक आश्रम की है। पुलिस ने बताया कि गुरुवार की देर रात आश्रम के रविनाथ ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मामला आश्रम के पास की जमीन से जुड़ा है। पुलिस ने मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है। जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है।

पुलिस के अनुसार विधायक पूराराम के पास आश्रम के पीछे की जमीन है, लेकिन प्रवेश का कोई रास्ता नहीं था। इस पर आश्रम से रास्ता निकालने को लेकर विवाद हो गया। तीन दिन पहले विधायक ने अपने व्यक्तियों को आश्रम में गड्ढा खोदने के लिए भेजा था। उन लोगो ने आश्रम के पास कुछ खुदाई भी की जिससे रविनाथ परेशान हो गए थे।

साधु की आत्महत्या की खबर मिलते ही आश्रम में साधु-संतों की भीड़ उमड़ गई लोगों के गुस्से को देखते हुए जसवंतपुरा, रानीवाड़ा और भीनमाल थाने से पुलिस को बुलाकर मौके पर तैनात कर दिया गया है।

आरोपों पर ये बोले विधायक
विधायक पूराराम चौधरी ने कहा कि सुंधा माता की तलहटी के पास हनुमान आश्रम के पीछे उनकी एक व्यावसायिक भूमि थी, जिसे उन्होंने 30 साल पहले खरीदा था। वह उस पर एक रिसॉर्ट बनाने की योजना बना रहे थे। गुरुवार को तहसीलदार से अनुमति लेकर पटवारी द्वारा जमीन की नाप-चोक की गई। कुछ दिन पहले साधु ने भी एतराज नहीं किया था, हमारे बीच कोई विवाद नहीं था।

गौरतलब है कि 21 जुलाई को भरतपुर के एक संत विजय दास ने भी अवैध खनन के विरोध में खुद को आग लगा कर आत्महत्या कर ली थी। दो दिन बाद जलने से उसकी मौत हो गई थी।