जयपुर में CHA के धरना स्थल पर किरोड़ी का रात्रि विश्राम, गहलोत सरकार को खुला चैलेंज

 
Kirori's night rest at CHA's picket site in Jaipur, open challenge to Gehlot government

जयपुर। राजस्थान में राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीना के नेतृत्व में CHA कर्मियों का धरना जारी है। किरोड़ी लाल सीएचए कर्मियों के समर्थन में खुलकर उतर आए है। सोमवार को किरोड़ी के नेतृत्व में कर्मियों ने राजधानी जयपुर में प्रदर्शन किया। इसकी वजह से अजमेर रोड पर जाम की स्थिति हो गई थी। किरोड़ी ने रात्रि विश्राम धरना स्थल पर ही किया।

इससे पहले सोमवार को राज्य सरकार से वार्ता का बुलावा मिलने के बाद सांसद किरोड़ी लाल मीणा के नेतृत्व में CHA का एक प्रतिनिधि मंडल सचिवालय पहुंच। इस प्रतिनिधि मंडल में सांसद के अलावा 10 अन्य लोग भी शामिल रहे। यहां इनकी मुलाकात हेल्थ डिपार्टमेंट के सचिव डॉ. पृथ्वी से हुई। कोविड सहायकों को संविदा केडर पर दोबारा भर्ती करनी की मांग रखी इस बैठक में रखी गई, जिस पर सहमति नहीं बनी। इसके बाद किरोड़ी लाल ने धरनार्थियों संग ही धरना स्थल पर खुले आसमान के नीचे रात गुजारी। 

उल्लेखनीय है कि कोविड स्वास्थ्य सहायक पिछले 150 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे। कोविड स्वास्थ्य सहायक ने आज जयपुर में अजमेर रोड स्थित महापुरा में पड़ाव डाला। राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा और विधायक रामलाल शर्मा भी मौजूद है। आंदोलनकारियों की भारी भीड़ को देखते हुए सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया था। लेकिन डेढ़ घंटे चली वार्ता बेनतीजा रही। जिसके बाद सांसद किरोड़ी अजमेर रोड स्थित कोठारी फार्म हाउस पर CHA संग धरने पर बैठ गए। इस दौरान CHA ने सीएम हाउस की तरफ कूच करने का प्रयास भी किया। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके चलते अजमेर रोड कुछ समय के लिए बंद रहा।

सरकार का संविदा कैडर देने से इंकार
आपको बता दें कोविड काल में सेवाएं देने वाले प्रदेशभर के CHA की सेवाओं को राज्य सरकार ने इस साल 31 मार्च को खत्म कर दिया था। राज्य सरकार ने कोरोना काल के दौरान कोविड स्वास्थ्य सहायकों की सेवाए ली थी। लेकिन कोराना कम होने पर सरकार ने इन्हें नौकरी से निकाल दिया था। सरकार का कहना था कि जब भर्ती की गई थी उस समय ही इस बात का उल्लेख किया था कि अस्थायी तौर पर लगाया जा रहा है। स्थायी होने की प्रक्रिया सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार होगी। CHA कर्मियों ने अपनी सेवाएं बहाल कर संविदा कैडर में शामिल करने की मांग की थी। लेकिन राज्य सरकार ने इन्हें नए सिरे से ज्वाइनिंग देने और संविदा कैडर में शामिल करने से मना कर दिया था।