बारां जिले के शहाबाद में झोपड़ी पर आयकर विभाग का छापा, मजदूर परिवार व अधिकारी रह गये हैरान, जानें क्या है मामला

 
झोपड़ी पर आयकर विभाग का छापा

बारां। जिले में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सोमवार आयकर विभाग द्वारा एक जगह छापामार कार्रवाई की। मामला जिले के शाहाबाद कस्बे का है। यहां आयकर विभाग के अधिकारी अपनी टीम के साथ पहुंचे। जिन पर वित्तीय अनियमितता के आरोप थे, उनका घर देख कर टीम हैरान थी। दरअसल, आरोपी परिवार मजदूरी कर अपना जीवन यापन करता है। अपनी झोपड़ी पर सरकारी अफसरों को देख वो भी हेरान रह गए। हालांकि, मामला को भांपकर इनकम टैक्स के अधिकारी उल्टे पैर लौट गए।

जानें यह है पुरा मामला
मजदूर परिवार का एक युवक शाहाबाद से जयपुर में मजदूरी करने गया था। युवक को मोटे वेतन का लालच देकर ठेकेदार ने मुंबई की बैंकों में खाते खुलवा दिए। युवक के घर सोमवार को जब आयकर विभाग के अधिकारियों की एक टीम पहुंची और युवक से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आया। युवक और उसके परिजन भी हैरान रह गए। इधर, झोपड़ी में रहने वाले युवक और उसके परिवार को देखकर अधिकारी भी पशोपेश पड़ गए। आयकर विभाग के अधिकारी मौके से ही सारी जानकारी लेकर वापस लौट गए। अधिकारियों ने मीडिया को कुछ भी बता देने से मना कर दिया।

इस मामले में युवक का कहना है कि जयपुर के ठेकेदार ने उसके साथ तीन मजदूरों के दस्तावेज लिए थे। उनके मुंबई के दो बैंकों में खाते खुलवाए गए थे। युवक ने बताया कि उसे भी इस बात का अंदाजा नहीं है कि उनके खातों से क्या गड़बड़ी की गई है। संभव है कि मोटे वेतन का लालच देकर उसके दस्तावेजों का ठेकेदार ने बेनामी संपत्ति और वित्तीय गड़बड़ी के लिए किया। संभवतया इसी मामले में यह टीम यहां पहुंची, लेकिन पीड़ित युवक से असलियत का पता चलने के बाद यहां से लौट गई।

 झोपड़ी में रहने वाले वीरू धानुक और दशरथ धानुक ने बताया कि आयकर अधिकारियों ने मुंबई में एक कंपनी को लेकर पूछताछ की। वीरू और दशरथ के साथ जयपुर के मनोज ने बताया कि वह हिंदी में साइन करता है। लेकिन ठेकेदार अंकित ने उसे अंग्रेजी में साइन करना सिखाया। कई चेक बुक जारी करवाई। जितनी भी चेक बुक जारी हुई। उन सभी चेकों पर हस्ताक्षर करवाए गए। एटीएम कार्ड भी बनवाया गया, जो अभी भी ठेकेदार अंकित के पास है। उसका पासवर्ड भी ठेकेदार अंकित को ही मालूम है। शुरू में 50 हजार रुपए आए, जो ठेकेदार ने रख लिए मनोज ने बताया कि मुंबई जाने के 17 दिन बाद मनोज के खाते में 50 हजार रुपए आए उनको निकलवाने के लिए ठेकेदार बैंक लेकर गया और खाते से 50 हजार रुपए निकलवाकर खूद ने रख लिए और बोला की उसकी मम्मी ने भेजे हैं।

मजदूरी करने जयपुर गया, वहां से मुंबई ले गया, मनोज ने बताया कि वह जयपुर चौकी पर रोजगार की तलाश में मजदूरों के साथ खड़ा था। वहां एक ठेकेदार अंकित आया और एक कॉलेज के पास स्थित होटल की सफाई का काम करवाने ले गया। सफाई के बाद शाम को ठेकेदार अंकित ने मनोज को भुगतान कर दिया। दो दिन बाद फिर ठेकेदार अंकित आया और बोला कि उसे चार अनपढ़ मजदूर चाहिए, जिनके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी होना चाहिए। जूते-चप्पलों की सप्लाई मुंबई में करवानी है। रोज एक हजार रुपए की दिहाड़ी से महीने का 30 हजार दिया करेंगे। मनोज ने बताया कि उसने जान पहचान वाले 4 लड़कों को बोला, तो वो तैयार हो गए और आधार कार्ड व वोटर आईडी लेकर अंकित के साथ उसके होटल पर चले गए।

पैन कार्ड नहीं होने के कारण पहले इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया और फिर पिछले साल सितंबर में मुंबई ले गया। वहां 5 लड़कों में से एक लड़के का पैन कार्ड करेक्शन नहीं हो पाया, इसलिए उसको छोड़ दिया गया, बाकी के 4 लड़कों को मुंबई ले गया। वहां दो बैंकों में खाता खुलवाकर कई जगह दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए। मनोज के साथ गए तीनों लड़कों सुरेंद्र, ललित, नरेंद्र को 15 दिन मुंबई में रखकर वापस भेज दिया और मनोज को वहीं रहने दिया। एक महीने बाद मनोज को 25 हजार रुपए का भुगतान कर दिया और 5 हजार आज तक शेष हैै।