जिस मामले में हाईकोर्ट में पुलिस ने जुर्म प्रमाणित माना उसी में आरोपियों को दोषमुक्त मानकर लगा दी एफआर

- पुलिस के मनमाने यू टर्न पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने लगाया ब्रेक
- सीएमओ की नाराजगी के बाद कोर्ट में पेश करने से रोकी गयी एफआर
- आईजी रविदत्त गौड़ के निर्देश के बाद तालेड़ा थाने से एसपी ने फाइल तलब की
 
charmesh sharma memo-

बूंदी। पुलिस भी कई बार रात का दिन और दिन का रात कर देती है। ऐसा ही वाकिया हुआ जब बून्दी जिले के तालेड़ा थाने में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कम्पनी के विरुद्ध 2019 में दर्ज जिस चर्चित मुकदमे में पुलिस ने राजस्थान उच्च न्यायालय में लिखित जवाब में आरोपियों के विरुद्ध जुर्म प्रमाणित मान लिया था। इस वर्ष उसी मुकदमे में एफआर लगाकर अपनी जाँच में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। लेकिन एफआर कोर्ट में पेश करने से ठीक पहले मुख्यमंत्री कार्यालय तक मामला पहुंच गया और उच्चस्तरीय निर्देशों के बाद एफआर को कोर्ट में पेश करने से रोक दिया गया।  

एफआइआर 309/2019 में तालेड़ा पुलिस ने कोर्ट में एफआर प्रस्तुत करने के लिये अभी 14 सितम्बर 2021 की तारीख तय कर ली थी, जिसका फरियादी को नोटिस भी जारी कर दिया था। लेकिन तालेड़ा कोर्ट में एफआर प्रस्तुत करने से ठीक पहले कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा के माध्यम से मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया और आरोपियों को दोषमुक्त करने का अनर्थ करने जा रही पुलिस को मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद पीछे हटना पड़ा।मुख्यमंत्री कार्यालय से मिले उच्च स्तरीय निर्देश के बाद इस विषय मे रेंज आईजी रविदत्त गौड़ ने तत्काल बून्दी पुलिस अधीक्षक शिवराज मीणा को एफआर रोकने के निर्देश दिये।जिसके बाद एसपी ने एफआर को कोर्ट में प्रस्तुत होने से  रुकवाते हुये तालेड़ा थाने से फाईल तलब कर ली है।मुख्यमंत्री कार्यालय से कार्यवाही के निर्देश के बाद इस मामले में कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा भी रेंज आईजी रविदत्त गौड़ से मिले जिस पर आईजी ने सीएमओ के निर्देश के बाद की गयी कार्यवाही की जानकारी देते हुये उचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया।

warant tamillll

जिला न्यायालय के होमगार्ड को भी नहीं मिला न्याय
मामले में 2019 में तत्कालीन बूंदी डिस्ट्रिक्ट जज उमाशंकर व्यास के कार्यालय में कार्यरत होमगार्ड जवान दिनेश वर्मा उसकी पत्नी व छोटा बच्चा मोटरसाइकिल पर बल्लोप के पास राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कंपनी की लापरवाही से हुये गहरे गड्ढों में गिरकर चोटिल हो गये थे।लगातार दुर्घटनाओं पर उस समय तालेड़ा थाना पुलिस की ओर से भी निर्माण कंपनी को गड्ढे भरने के लिए कई पत्र लिखे गये थे। तत्कालीन तालेड़ा थाना अधिकारी रमेश तिवारी ने दिनेश वर्मा की रिपोर्ट पर हाईवे निर्माण कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध धारा 283, 336, 337 मे मामला दर्ज किया गया था। पुलिस की ओर से पीड़ितो का मेडिकल भी करवाया गया था। फरियादी दिनेश वर्तमान में भी डीजे कोर्ट में ही कार्यरत है और यह भी विडम्बना ही है कि जिला जज कोर्ट में कार्यरत होमगार्ड के जवान को भी पुलिस से न्याय नहीं मिल पाया।

हाईकोर्ट में जुर्म प्रमाणित माना
इस मामले में मामला दर्ज होने के बाद आरोपियों की ओर से 482 के तहत राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर में एफआईआर रद्द करने के लिये याचिका दायर की गयी थी।जिस पर हाईकोर्ट ने अग्रिम कार्यवाही पर रोक लगाते हुये तालेड़ा पुलिस से जवाब मांगा था।जिस पर पुलिस की ओर से हाईकोर्ट में प्रस्तुत लिखित जवाब में मामले में आरोपियों के विरुद्ध जुर्म प्रमाणित माना गया था। पुलिस के जवाब के बाद उच्च न्यायालय ने  एफआइआर को रदद् नहीं किया। हाईकोर्ट एफआइआर रद्द कर देता तो पुलिस को एफआर पेश करने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

गिरफ्तारी के लिये गये थे थानाधिकारी
मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तत्कालीन थानाधिकारी रमेश तिवारी अजमेर जिले के निर्माण कम्पनी के  टोल व अन्य स्थानों पर भी गये थे और पुलिस की ओर से नोटिस भी चस्पा कर के आये थे। उस समय मामले की जांच थानाधिकारी  ही कर रहे थे।उन्होंने भी राजस्थान उच्च न्यायालय में पुलिस की ओर से तत्कालीन समय जवाब में आरोपियों के विरुद्ध जुर्म प्रमाणित मानने की पुष्टि की है।