देवनारायण योजना - प्रकृति की गोद मे पशुपालकों का हाईटेक कस्बा, स्वायत्त शासन मंत्री धारीवाल की अनोखी योजना

 कैटल फ्री शहर बनेगा कोटा, 738 आवास मय केटल शेड के निर्माण, नगर विकास न्यास की महत्वपूर्ण योजना अंतिम चरण में
 
नगर विकास न्यास की महत्वपूर्ण योजना अंतिम चरण में

कोटा, (अनभव मित्तल)। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल की पहल पर प्रदेश ही नहीं देश की वो अनूठी योजना जो पशुपालकों को प्राकृतिक माहौल के बीच शहरी क्षेत्र की सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने और उनके जीवन स्तर में अमूलचूल परिवर्तन करने वाली नगर विकास न्यास कोटा की देवनारायण योजना लगभग तैयार हो चुकी है। प्रकृति की गोद मे पशुपालकों का यह हाई टेक कस्बा तैयार हो चुका है।

738 आवास मय केटल शेड के निर्माण

स्मार्टसिटी के साथ कैटल फ्री सिटी....बढ़ते कदम
कोटा को जहाँ स्मार्ट सिटी के साथ पर्यटन नगरी, ट्रैफिक लाइट फ्री सिटी बनाने की तैयारी जोर शोर पर चल रही है वही कोचिंग सिटी जल्द केटल फ्री शहर भी बनने जा रहा है। पशुपालकों को एक ही जगह पर सभी सुविधाएं प्रदान किए जाने ओर कोटा शहर को पशुओं से मुक्त और पशुपालकों के जीवन स्तर में सुधार करने के उद्देश्य से बनाई गई नगर विकास न्यास की देवनारायाण योजना का कार्य अब अतिम दौर में है । योजना के तहत 738 आवासों का मय बाडे, चारा स्टोर की सुविधा के साथ निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही देवनारायण योजना में पशुपालको उनके परिवारों के लिए पानी, बिजली, सडक, चिकित्सा, गोबर गैस संयंत्र पुलिस चौकी, प्रशासनिक भवन आदि की सुविधाएं भी उपलब्ध करवा रही है यही नही पशुपालकों के लिए सामुदायिक भवन, बच्चों के लिए स्कूल, चिकित्सालय, पशु चिकित्सालय जैसी सभी सुविधाएं भी दी जा रही है। पशुओं के लिए तालाब, खुला चारागाह, विचरण के लिए अनुकूल जगह भी यहा उपलब्ध है।

कैटल फ्री शहर बनेगा कोटा

योजना का  उद्देश्य
योजना का मुख्य उद्देश्य यह हैं कि पशुपालक और उनके परिवारों  शैक्षणिक ,सामाजिक एवं आर्थिक विकास करना है साथ ही पशुओं का दूध दोहने के बाद विचरण करने हेतु सड़कों पर खुला छोड़ दिया जाता था। शहर की व्यस्त सड़को पर पशुओं के विचरण से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है। इन दुर्घटनाओं के कारण कई लोगों की अकाल मृत्यु हुई एवं कई लोग घायल भी हो जाते है यही नही सड़को पर पशुओं के विचरण से यातायात में भी काफी व्यवधान आता है। इस समस्या के निदान के लिए पहले कोटा में सर्वे किया गया कि कितना पशुधन है, और कितने पशुओं को पशुपालकों सड़को पर छोड़ देते है, ।इसके बाद  देशभर में जहाँ भी पशुपालको के लिए जो आवासीय योजनाएं बनाई गई उंनको देखकर उनसे ज्यादा सुविधायुक्त पशुपालको के हित को ध्यान में रखते हुए यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के निर्देशन में देश की ऐसी पहली योजना को अंजाम तक पहुचाया जा रहा है। पशुपालकों में भी योजना को लेकर खासा उत्साह हैं । पशुपालकों का कहना है कि उंनको नारकीय जीवन से मुक्ति मिलेगी साथ ही परिवार को सुरक्षित माहौल सभी सुविधाओं के साथ मुहैया हो रहा हैं। 

300 करोड़ की लागत से बने देवनारायण योजना
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2020-21 में 300 करोड़ की लागत से कोटा शहर के पशुपालकों को सुव्यवस्थित रूप से बसाने के लिए देवनारायण एकीकृत आवासीय योजना विकसित करने की घोषणा की गई थी। मुख्यमंत्री द्वारा  इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी। नगर विकास न्यास द्वारा पशुपालकों के लिए देवनारायण नगर एकीकृत आवासीय योजना के राजस्व ग्राम धर्मपुरा एवं बंधा की 105.09 हैक्टेयर भूमि का चयन किया गया। यह कस्बा घनी आबादी से दूर है। योजना के तहत  पशुपालकों के लिए 738 आवासीय भूखण्डों (35 फीट गुणा 90 फीट के 380 आवास 35 फीट गुणा 70 फीट का निर्माण किया गया है। पिछले भाग में लगभग 40 वर्गमीटर क्षेत्रफल में 2 कमरे, रसोईघर, शौचालय, स्नानघर बरामदा एवं चारास्टोर की सुविधा से युक्त आवास का निर्माण किया गया है, पशुओं के लिए शेड का निर्माण किया गया है। जिसमें भूखण्ड के क्षेत्रफल के अनुसार 18 से 20 या 26 से 28 पशुओं के पालने की क्षमता होगी। योजना में आवासीय भूखण्डों के अतिरिका डेयरी उद्योग, भूसे गोदाम , खलचूरी गोदाम के सामान्य व्यावसायिक क्षेत्र भी बनाये गए है।

पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं से मिलेगी निजात
इस योजना से कोटा शहर को पशुओं के विचरण के कारण हो रही अकाल मृत्यु एवं दुर्घटनाओं से तो मुक्ति मिलेगी साथ ही पशुपालक परिवारों का शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक विकास भी होगा। पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को दृष्टिगत रखते सामाजिक सरोकार निभाते हुए सरकार द्वारा  योजना को धरातल लाया गया हैं। कोचिंग सिटी की यह योजना नज़ीर बनेगी और दूसरे राज्य भी पशुपालकों के लिए ऐसी योजनाएं लाकर उनको राहत पहुचाएंगी।