बूंदी : वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह की गिरफ्तारी पर डीजे कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक

 -निचली अदालत ने गिरफ्तारी वारंट से तलब कर 6 जनवरी 2022 को उपस्थित होने के दिये थे आदेश 
- बूंदी रियासत के पूर्व नरेश स्वर्गीय रणजीत सिंह की संपत्ति से जुड़ा मामला
 
पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह की गिरफ्तारी पर डीजे कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक

बूंदी। न्यायालय जिला एवं सेशन न्यायाधीश बूंदी में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बूंदी के 18 नवंबर 2021 के आदेश को चुनोती देते हुए रिवीजन दायर की गई।  रिवीजन पर सुनवाई करते हुए सोमवार को भवँर जितेंद्र सिंह की गिरफ्तारी पर जिला एवं सेशन न्यायधीश ने 5 जनवरी 2022 तक अंतरिम रोक लगा दी है। अविनाश चानना के वकील की ओर से न्यायालय में खुद को रिवीजन में पार्टी बनाने के लिए दरख्वास्त पेश की जिस पर भवँर जितेंद्र सिंह के वकील द्वारा अनापत्ति की गई। वहीं लोक अभियोजक योगेश यादव ने सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक का घोर विरोध किया है। मामले की अगली सुनवायी 6 जनवरी 2022 को होगी।

गौरतलब है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह को फर्जी डीड के आधार पर ट्रस्ट बनाने के मामले में गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था। इस मामले में न्यायालय ने बूंदी के पूर्व जिला प्रमुख श्रीनाथ सिंह हाडा, भंवर जितेंद्र सिंह के ससुर बृजेंद्र सिंह को भी गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था। मामले में 6 जनवरी 2022 को न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिये थे। क्या है मामला-
बूंदी रियासत के पूर्व नरेश स्वर्गीय रणजीत सिंह ने अपने हिस्से की संपत्ति की वसीयत अपने मित्र अविनाश चानना के नाम की थी, स्वर्गीय रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद उनके भांजे पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह ने एक ट्रस्ट डीड उजागर की जिसमें स्वर्गीय रणजीत सिंह ने अपनी संपत्ति की ट्रस्टी डीड बनाकर उसे आशापुरा माता मंदिर को समर्पित कर दिया। इस वसीयत के अनुसार आशापुरा माताजी मंदिर का इन्चार्ज भंवर जितेंद्र सिंह को मुख्य सेवायत बनाया गया था। इस आधार पर स्वर्गीय रणजीत सिंह की सारी संपत्ति आशापुरा ट्रस्ट को हस्तानांतरित कर दी गई, अविनाश चानना के पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर एडवोकेट कानसिंह राठौड़ ने बताया कि भंवर जितेंद्र सिंह ने वर्ष 2008 में इस ट्रस्ट डीड को बनना बताया। जबकि 8 मई 2008 को हाईकोर्ट में भंवर जितेंद्र सिंह ने संपत्ति विवाद के मामले में स्वर्गीय रणजीत सिंह के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने न्यायालय से उनके मामा स्वर्गीय रणजीत सिंह को जेल भेजने की अपील की थी जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था।

उसी दौरान स्वर्गीय रणजीत सिंह ने न्यायालय में शपथ पत्र देकर अनुरोध किया था कि मेरी और भंवर जितेंद्र सिंह के बीच संपत्ति का बंटवारा कर दिया जाए मुझे मेरे हिस्से की संपत्ति दे दी जाए जिसका कि मैं अपने जीवन काल में उपयोग और उपभोग कर सकूं। इसी दौरान भंवर जितेंद्र सिंह ने स्वर्गीय रणजीत सिंह के द्वारा उनके संपत्ति की ट्रस्ट डीड बनना बताया जिसमें भंवर जितेंद्र सिंह को मुख्य सेवारत मनोनीत किया गया था। चानना के वकील ने न्यायालय में इसी आधार पर पुलिस की अंतिम रिपोर्ट (एफआर) को चुनौती दी थी, कि एक तरफ भंवर जितेंद्र सिंह संपत्ति मामले में न्यायालय की अवमानना कर अपने मामा स्वर्गीय रणजीत सिंह को जेल भेजने की अपील कर रहे थे। उसी समय उनके मामा कैसे ट्रस्ट डीड कर सकते हैं और जब इस ट्रस्ट डीड के आधार पर भंवर जितेंद्र सिंह स्वर्गीय रणजीत सिंह की संपत्ति के मुख्य कर्ताधर्ता हो गए थे तो फिर उन्होंने मामा के खिलाफ संपत्ति का केस उनकी मृत्यु के बाद तक क्यों चलाए रखा।

इस मामले में स्वर्गीय रणजीत सिंह के मित्र अविनाश चानना ने ट्रस्ट डीड को फर्जी बताते हुए वर्ष 2017 में कोतवाली थाने में भंवर जितेंद्र सिंह और अन्य पदाधिकारी पूर्व जिला प्रमुख श्रीनाथ सिंह हाड़ा, ब्रजेंद्र सिंह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवाया था। भंवर जितेंद्र सिंह ने राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर इस मुकदमे को खारिज करने की अपील की थी जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था। जबकि पुलिस ने इस मामले को दिवानी मामला बताते हुए अंतिम रिपोर्ट (एफआर) न्यायालय में पेश कर दिया था। न्यायालय में अविनाश चानना ने पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर को चुनौती दी थी। जिस पर गौर करने के बाद प्रसंज्ञान लेते हुए भंवर जितेंद्र सिंह, श्रीनाथ सिंह हाडा, बृजेंद्र सिंह को धारा 420, 467, 468, 471 में दोषी मानते हुए गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था।