संस्कार एवं योग, मानव जीवन को परिष्कृत करने वाली एक आध्यात्मिक विद्या है- रेणु जयपाल

 
संस्कार एवं योग, मानव जीवन को परिष्कृत करने वाली एक आध्यात्मिक विद्या है- रेणु जयपाल

बूंदी। जैत सागर रोड स्थित श्री माहेश्वरी भवन में श्री माहेश्वरी पंचायत संस्थान एवं आर्य वीर दल बूंदी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय वैदिक संस्कार एवं योग साधना क्रियात्मक अभ्यास शिविर का समापन शुक्रवार को हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर रेणु जयपाल रही। अध्यक्षता दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़ गुजरात के आचार्य अरुण कुमार ने की, विशिष्ट अतिथि दीप्ति आर्या, सुयशा आर्या, अनीता आर्या, आचार्या, आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय द्रोणस्थली देहरादून, नीरज गोयल अध्यक्ष श्री चावल उद्योग संघ बूँदी, आर्य समाज के प्रदेश पदाधिकारी कोटा के अर्जुन देव चड्डा, बड़ा रामद्वारा बूंदी के पीठाधीश व नैनवां रोड़ गौशाला संचालक महंत आत्माराम व राजवीर जी रहे ।

जैत सागर रोड स्थित श्री माहेश्वरी भवन में श्री माहेश्वरी पंचायत संस्थान एवं आर्य वीर दल बूंदी के संयुक्त तत्वावधान में

कार्यक्रम के प्रारंभ में मंगलाचरण हुआ जिसमें ऋग्वेद के प्रथम सूक्त अग्नि सूक्त का सस्वर वेद पाठ प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत भगवान बिरला, अध्यक्ष माहेश्वरी पंचायत संस्थान बूँदी, अभय देव शर्मा शिविर संयोजक, चंचल शर्मा, अंजना शर्मा, विद्या बिरला , बीना शर्मा, रामचरण आर्य, पीसी मित्तल, राजेंद्र जी मुनि, हेमालाल मेघवंशी आदि ने दुपट्टा व शॉल ओढ़ाकर अतिथियों का स्वागत किया।

 स्वागत के बाद इस शिविर में आयोजित विभिन्न गतिविधियों की संक्षिप्त प्रस्तुतियां हुई जिसमें शिविरार्थियों द्वारा संवाद, वेद पाठ तथा योगासन प्रदर्शन आदि हुआ। शिविर प्रतिवेदन अभय देव शर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया । मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर रेणु जयपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज की युवा पीढ़ी में संस्कार जागृत करने के लिए ऐसे शिविर आवश्यक हैं। इनके माध्यम से हम ना केवल बौद्धिक उन्नति बल्कि आत्मिक उन्नति भी करते हैं जो कि आज समाज की बड़ी आवश्यकता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य अरुण कुमार ने चरैवेति चरैवेति का वैदिक महत्व समझाया व बताया कि प्रत्येक व्यक्ति में सामर्थ्य होता है। यदि वह चाहे तो सभी समस्याओं का निदान कर सकता है। इसलिए ऐसे शिविर हमें अपनी क्षमताओं की पहचान कराने में सहायक होते हैं। इसलिए ऐसे शिविर आयोजित होते रहने चाहिए। दीप्ति आर्या ने अपने उद्बोधन में बताया कि गुरुकुल किस प्रकार से भारतीय संस्कृति के प्रसार मे और रक्षा करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। आज आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों को गुरुकुल में अध्ययन के लिए भेजें। इसके बाद राष्ट्रीय योग प्रतियोगिता के लिए चयनित विभिन्न प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह देकर उनका उत्साहवर्धन किया। इसके साथ ही सभी शिविर में सहयोगकर्ताओं को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। शिविर में उपस्थित सभी अतिथियों और शिविरार्थियों को भगवान बिरला ने धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ आशुतोष बिरला ने किया ।

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