महिलाओं की अनूठी परम्परा- दूल्हे से लेकर पण्डित व बाराती तक सभी भूमिका महिलाएं ही करती है अदा

 
Unique tradition of women - from the groom to the pandit and the procession, all the roles are played by women.

बूंदी। प्राचीन समय मे महिलाओं द्वारा विवाह में फेरे के दिन निभाई जाने वाली टूटिया की परंपरा को अभी भी ग्रामीण परिवेश से जुड़े परिवारों में धूमधाम से उत्साहपूर्वक निभाई जा रही है, जिसमे दूल्हे से लेकर पण्डित व नाई, ढोल बाजे बजाने वाले से लेकर बाराती तक कि सभी भूमिकाएं महिलाएं ही अदा करती है।

Unique tradition of women - from the groom to the pandit and the procession, all the roles are played by women.

इस परम्परा को गांव विजयगढ़ से आकर बून्दी शहर के जवाहर नगर में बसे सेवानिवृत्त शिक्षक दुर्गा लाल शर्मा के परिवार में पोते डॉ. अक्षय की शादी के दौरान जब महिलाओं ने परंपरा निभाई तो मोहल्ले से निकले बारात के जुलूस को मोहल्ले वासी देखते रह गए जिसमे दूल्हे के रूप में ज्योति शर्मा सजधजकर भूमिका निभा रही थी तो वही दुल्हन के रूप में मोना शर्मा सजी हुई थी। इसमें बारात के रूप में सभी बाराती भी महिलाएं ही थी जो ढोल की थाप पर दूल्हे ज्योति की बारात लेकर भारत नगर में रहने वाली कमलेश शर्मा के घर पहुँची जहां तोरण स्वागत परम्परा का निर्वहन किया गया। इस तरह सदियों से विवाह के दिन महिलाओं द्वारा निर्वहन की जा रही परम्परा धूमधाम से उत्साहपूर्वक निभाई गई।

गौरतलब है कि प्राचीन समय मे जब महिलाएं बारात में नही जाती थी तब पीछे घर मे रहने वाली महिलाएं भी बारात जैसी शादी की भमिकाए निभाकर शादी की खुशियां मनाती थी जिसे टूटिया में नाम से जाना जाता है। आज भी ग्रामीण क्षेत्र में व ग्रामीण से शहर में जाकर बसने वाले अधिकांश परिवार भी शहरों में लुप्त हो चुकी इस परम्परा को जीवंत रखे हुए है।