24 वर्ष से न्याय की आस में भटक रहे मृत राज्य कर्मचारी के पुत्र के छलके आँसू

- कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा के साथ एडीएम को ज्ञापन देकर उठायी नियुक्ति की मांग
 
Tears spilled from the son of a deceased state employee, wandering in the hope of justice for 24 years

बूंदी। पिछले 24 वर्ष से न्याय की आस में दर-दर की ठोकरें खा रहे स्वास्थ्य विभाग के मृत राज्य कर्मचारी के पुत्र के बुधवार को बूंदी जिला कलेक्ट्रेट में अपनी पीड़ा बताते हुए आंखों में आंसू छलक आये और गला रूंध गया। नैनवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वार्ड बॉय के पद पर कार्यरत बाबूलाल गौड़ का 1998 में आकस्मिक निधन हो गया था। परिवार की ओर से उस समय उनके 17 वर्षीय पुत्र दुर्गेश गौड़ ने पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति के लिये आवेदन किया था। लेकिन 24 वर्ष बाद भी उसे नियुक्ति नहीं मिली और वह न्याय की आस में बूंदी सीएमएचओ कार्यालय, नैनवा स्वास्थ्य केंद्र और जयपुर के चक्कर लगा रहा है।

कलेक्टर के नाम एडीएम को दिया ज्ञापन
बुधवार को स्वास्थ्य विभाग में नैनवां में वार्ड बॉय के पद पर कार्यरत रहे मृत राज्य कर्मचारी स्व. बाबूलाल गौड़ के के पुत्र दुर्गेश गौड़ ने कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा के साथ एडीएम सीलिंग अमानुल्लाह खान को जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगायी। कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा ने इस बात को बहुत दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि राजकीय सेवा देने वाले कर्मचारी की मृत्यु के 24 वर्ष बाद भी मृत कर्मचारी के पुत्र को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। उन्होंने मृत राज्य कर्मचारी के पुत्र की तत्काल नियुक्ति की मांग उठायी। इस दौरान कांग्रेस की प्रवासी सहायता टीम के सदस्य पार्षद अंकित बूलीवाल भी साथ रहे।

विभाग 2001 में ही मान चुका नियुक्ति का हकदार
यह भी उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अपनी रिपोर्ट में 23 अक्टूबर 2001 को ही दुर्गेश गौड़ को अपने पिता के स्थान पर अनुकम्पात्मक नियुक्ति का हकदार माना जा चुका है। नैनवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वार्ड बॉय के पद पर कार्यरत बाबूलाल गौड़ का 25 दिसंबर 1998 में आकस्मिक निधन हो गया था। परिवार की ओर से उस समय उनके 17 वर्षीय पुत्र दुर्गेश गौड़ ने पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति के लिये आवेदन किया था। दुर्गेश बालिग होने के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए बूंदी सीएमएचओ के द्वारा नैनवा सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के चिकित्सा प्रभारी से रिपोर्ट मांगी गयी थी। चिकित्सा प्रभारी द्वारा सीएमएचओ को 23 अक्टूबर 2001 को पत्र क्रमांक संस्था 2001 566 के द्वारा सीएमएचओ को भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया था कि दुर्गेश कुमार को इसके पिता के आश्रित होने के नाते सहानुभूतिपूर्वक मानवीय दृष्टिकोण से नियुक्ति दिया जाना उचित होगा क्योंकि इस परिवार में अन्य कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार से रोजगाररत नहीं है।

गुरुवार को करेंगे सीएमएचओ का घेराव
पार्षद अंकित बूलीवाल ने बताया कि गुरुवार दोपहर 12ः15 बजे मृत राज्य कर्मचारी के पुत्र दुर्गेश गौड़ को न्याय दिलवाने के लिये बूंदी सीएमएचओ कार्यालय में प्रदर्शन करते हुये सीएमएचओ का घेराव किया जायेगा।