कॉफी विद कलक्टर : सथूर, बडौदिया, ठीकरदा का घास भैरू महोत्सव होगा राज्य पर्यटन के कैलेण्डर में शामिल

- जिला कलक्टर ने घास भैरू महोत्सव के स्थानीय लोक कलाकारों से ‘कॉफी विद कलक्टर’ कार्यक्रम में की चर्चा
 
Coffee with Collector: Ghas Bhairu Festival of Sathoor, Barodia, Thikarda will be included in the state tourism calendar

बूंदी। जिले के ठीकरदा, बडौदिया और सथूर में दीपावली के बाद आयोजित घास भैरू महोत्सव का आयोजन अपने आप में अनूठा है। स्थानीय लोक कलाकारों की कलाओं के हैरतभरे करतब हर किसी को आश्चर्य में डाल देते है (The astonishing feats of folk artists' arts astonish everyone)। यह बात जिला कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने शुक्रवार को ठीकरदा, बडौदिया और सथूर गावं में घास भैरू महोत्सव में शामिल स्थानीय कलाकारों से ‘काफी विद कलक्टर’ कार्यक्रम में चर्चा की दौरान कही। जिला कलक्टर ने कलाकारों से चर्चा के दौरान कहा कि तीनों गांवों में आयोजित होने वाले घास भैरू महोत्सव को देखने दूर दूर से हर वर्ष लाखों लोग व विदेशी सैलानी यहां आते है। ऐसे में इस कला का अधिकाधिक प्रचार प्रसार हो, ताकि यहां के कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिल सके।

उन्होंने कहा कि तीनों गांव एक लाइन के गांव है, ऐसे में इसे एक पर्यटन सर्किट रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे इस क्षेत्र का भी विकास हो सकेगा। उन्हांेने कलाकारों द्वारा महोत्सव आयोजन के लिए स्वयं राशि वहन करने की प्रशंसा भी की। 

राज्य पर्यटन कैलेण्डर में शामिल करने के लिए लिखा पत्र 
दीपावली के तीसरे दिन भैया दूज के अवसर पर ठीकरदा, सथूर व बडौदिया गांव में स्थानीय कलाकारों एवं ग्रामीणों द्वारा घास भैरू महोत्सव को राजस्थान के पर्यटन कैलेण्डर में शामिल करने के लिए जिला कलक्टर ने पर्यटन विभाग के निदेशक को पत्र लिखा है। इसकी जानकारी उन्होंने काफी विद कलक्टर कार्यक्रम के दौरान कलाकारों दी। उन्होंने बताया कि बूंदी जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित तीनों गांवों के स्थानीय कलाकारों एवं ग्रामीणों द्वारा घास भैरू महोत्सव के माध्यम से लोक संस्कृति की अनूठी मिसाल पेश की जाती है। सवारी में शिव प्रतिमा से पानी निकलना, चकरी चलना, बावडी में पत्थर तैरना, सूत पर भारी भरकम पत्थर लटकाने जैसी कलाओं के साथ साथ बैलों की जोडियों के माध्यम से बाबा घास भैरू की सवारी निकाली जाती है। इन हैतरअंगेज करतबों को देखने जिलेभर से लाखों लोग और बडी संख्यश विदेशी पर्यटक भी यहां आते है। ऐसे में पर्यटन कैलेण्डर के मेले-त्यौहार में इस महोत्सव के शामिल होने से गांवों के स्थानीय लोक कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलेगा और तीनों गांव पर्यटन के रूप विकसित हो सकेंगे। 

घास भैरू महोत्सव जैसे ’जादू का मेला’    
जिला कलक्टर ने कहा कि महोत्सव के दौरान स्थानीय लोक कलाकारों की कलाओं का प्रदर्शन अद्भुत और हैरान कर देने वाला है। उन्होंने स्वयं भी बडौदिया में घास भैरू महोत्सव में स्थानीय कलाकारों की कलाओं को देखकर आश्चर्यचकित है। उन्होंने कहा कि घास भैरू महोत्सव में पहुंचकर ऐसा लगता है जैसे ’जादू के मेले’ में आ गए है। 

उन्होेंने कहा कि घास भैरू महोत्सव के दौरान अलग से मेला स्थल के लिए जगह चिन्हित की जाए, ताकि इस आयोजन को और अधिक बेहतर बनाया जा सके। इस अवसर पर कलाकारों के दल ने कहा कि अगली बार जिला कलक्टर के मार्गदर्शन में मेले के आयोजन को और अधिक बेहतर बनाने के लिए तीनों गांवों के कलाकारों की बैठक लेंगे।  

कॉफी विद कलक्टर कार्यक्रम में सथूर, बडौदिया एवं ठीकरदा के लोक कलाकार मुकेश कुमार सैनी, पूर्व  सरपंच ठीकरदा रामकिशन, बडौदिया सरपंच राधेश्याम गुप्ता, मदन कोटवाल, महावीर सैनी, खुशीराम सैनी, भंवरलाल सैनी, रमेश सैनी, लक्ष्मण, भैरूलाल सैनी, तुलसीराम सैनी, दौलतराम सैनी, मुकेश सैनी, कैलाश सैनी, रामपाल, शिवराज सैनी, डालुराम सैनी व रामदयाल सैनी शामिल रहे।