बूंदी : दहेज में नहीं लिया एक भी रूपया और सामान, नैनवां के शिक्षक दंपत्ति ने पुत्र की शादी में दिया बड़ा संदेश

 - मौर्य परिवार द्वारा दहेज ना लेने का निर्णय बना चर्चा का विषय
 
Bundi: Not a single rupee and goods were taken in dowry, Nainwan's teacher couple gave a big message in son's marriage
बूंदी। राजस्थान में बूंदी जिले के नेनवां (Nenwan of Bundi district in Rajasthan) में हुई एक अनोखी शादी का मामला चर्चा में बना (The matter of unique marriage became in discussion) हुआ है। यहां नैनवां के एक अध्यापक -अध्यापिका ने अपने पुत्र की शादी में एक भी रुपया, एक भी सामान दहेज में नहीं लिया। परिवार ने बिना दहेज के ही शादी करवा कर समाज को एक संदेश दिया (Gave a message to the society by getting married without dowry) है।

 जानकारी के मुताबिक, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाछोला में अध्यापक नैनवां के कंवर नैनसिंह कॉलोनी निवासी पप्पू लाल मौर्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खानपुर में अध्यापक मधुलता मौर्य के पुत्र योगेश मौर्य की शादी तीन नवंबर को धुमधाम से हुई है। दुल्हा योगेश वर्तमान में पोस्टल डिपार्टमेंट में सॉर्टिंग असिस्टेंस के पद पर कोची (केरला) में कार्यरत है ओर इनका सलेक्शन जीएसटी इंपेक्टर पद पर हो चुका है। 

मौर्य परिवार द्वारा दहेज ना लेने के निर्णय को समाज के प्रबुद्वजनो ने भी सराहा है। शिक्षक दंपत्ति के द्वारा अपने पुत्र कि शादी में दहेज नही लेने के निर्णय ने समाज को संदेश दिया है। पूरा समाज इस कार्य के लिए उन्हें बधाइयां दे रहा है। यहीं कारण है कि यह बिन दहेज वाली शादी चर्चा में आ गई।  

दुल्हे के पिता अध्यापक पप्पू लाल मौर्य ने बताया की शादी में दुल्हन पक्ष की ओर से कई बार दहेज में कभी गाड़ी तो कभी सोने के आभूषण देने की बात कही, लेकिन उन्होंने किसी भी रूप में दहेज को स्वीकार नही किया। उन्होंने कहा कि एक अध्यापक अपने जीवन मे हजारो बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है ऐसे में उन्हें कई बार अनेको कुरीतियों को दूर करने की शिक्षा भी दी जाती है, फिर एक शिक्षक ही अपने पुत्र की शादी में दहेज जैसी कुरीति को अपनाए या अपनी पुत्री की शादी में दहेज दे तो वो सही मायनों में शिक्षक नही बन सकता है। एक शिक्षक का कार्य बच्चों को सकारात्मक शिक्षा व संस्कार प्रदान करना है व स्वयं भी उसी शिक्षा का अनुसरण करना है।

योगेश मौर्य ने कहा कि उनकी समाज में दहेज नामक अभिशाप अपनी जड़ें गहरी हो चुकि है। समाज मे जितना बड़ा लड़के का काम होता है उसे उतना ही अधिक दहेज मिलता है और इससे लड़की का परिवार भारी कर्ज में डूब जाता है जिससे उसे उबरने में कई वर्ष लग जाते है। इसी दहेज प्रथा के कारण समाज मे लड़की को बोझ समझा जाता है। इसी कारण ना दहेज लेना व ना ही देना है का निर्णय लिया गया है।