रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई सेक्टर को विकसित कर कोटा का औद्योगिक गौरव लौटाएंगे: बिरला

-लोकसभा अध्यक्ष ने एमएसएमई से रक्षा क्षेत्र में संभावनाएं तलाशने का किया आव्हान
 
Will return industrial pride of Kota by developing MSME sector in defense sector: Birla

कोटा। कोटा के एमएसएमई उद्यमियों के लिए रक्षा क्षेत्र अनंत संभावनाओं से भरा (Defense sector full of endless possibilities for Kota's MSME entrepreneurs) है। हमारी कोशिश है कि रक्षा क्षेत्र में काम कर रही सरकारी और निजी कम्पनियों की मदद से इन एमएसएमई यूनिट्स को नई दिशा दी जाए (New direction should be given to these MSME units with the help of private companies.)। ऐसा करके ही हम कोटा का औद्योगिक गौरव लौटा पाएंगे। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह बात सोमवार नेशनल डिफेंस एमएसएमई कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए कही।

दशहरा मैदान में आयोजित इस कॉन्क्लेव को कोटा और राजस्थान के लिए ऐतिहासिक बताते हुए स्पीकर बिरला ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत सरकार ऐसी नीतियां और कार्यक्रम लाई है जिसमें नवाचार के माध्यम से उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। सरकार मेक इन इंडिया को भी एक संकल्प के रूप में लेते हुए रिसर्च और डवलपमेंट को प्रोत्साहित कर रही है।

इसके चलते देश में सरकारी और निजी कंपनियां एमएसएमई को साथ लेकर उत्कृष्ट रक्षा उपकरण तथा सेवाएं दे रहे हैं। इससे एक ओर न सिर्फ हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर पा रहे हैं बल्कि अब रक्षा क्षेत्र में इम्पोर्टर से एक्सपोर्टर बन रहे हैं। देश को इस स्थिति में लाने में एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स की अहम भूमिका है। इसी कारण सरकार युवाओं की सोच से प्रेरणा प्राप्त करते हुए उनकी हर संभव सहायता कर रही है और उनकी राह की अनावश्यक बाधाओं को भी दूर कर रही है।

स्पीकर बिरला ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हमारी महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि आवश्यकता है। तेजी से बदलती तकनीक के इस जमाने में युद्ध आमने-सामने नहीं लड़े जाते। इलेक्ट्रोनिक, टेक्नोलॉजिकल और आईटी प्लेटफार्म के जरिए सीमा से दूर रहते हुए भी हम युद्ध को नियंत्रित कर सकते हैं। ऐसे में बहुत आवश्यक है कि तीनों प्लेटफॉर्म हमारे स्वयं के नियंत्रण में हों। इसमें एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स की अहम भूमिका है। देश में बढ़ती रोजगार आवश्यकताओं की पूर्ति में भी एमएसएमई और स्टार्टअप अहम योगदान दे सकते हैं।

इस सबको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एक व्यापक दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहा है। कोटा और राजस्थान के एमएसएमई और स्टार्ट-अप को भी इसका लाभ मिले इसमें यह कॉन्क्लेव अहम भूमिका निभाएगा। हमारी कोशिश रहेगी कि कोटा के एमएसएमई उद्यमियों को रक्षा क्षेत्र में काम कर रही सरकारी और निजी कंपनियों के साथ इंटीग्रेट करें ताकि यहां भी डिफेंस से जुड़ा उद्योग पनप सके। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि एक समय था जब रक्षा क्षेत्र में भारत को मांगने वाला देश माना जाता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब नए विजन के साथ काम करते हुए दुनिया को देने वाला देश बन गया है। हम दुनिया के टॉप-25 डिफेंस एक्सपोर्टर में हैं, 2014 के बाद हमारे रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, इतना ही नहीं हम रक्षा बजट को खर्च करने वाले विश्व के प्रथम तीन देशों में है। हम जल-थल और नभ, तीनों जगह मजबूत स्थिति में हैं, पूर्व में घाटे में वाले सरकार के सारे रक्षा उत्पादन उपक्रम अब मुनाफे में हैं जो दिखाता है कि रक्षा क्षेत्र में किस गंभीरता से काम किया जा रहा है।

इस सब का फायदा हमारे एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स को मिल रहा है। उन्हें बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ तक के ऑर्डर एमएसएमई के लिए आरक्षित कर दिए हैं। सरकार एमएसएमई और स्टार्टअप को मदद करने वाली नीतियां बना रही है। इस कॉन्क्लेव के माध्यम से कोटा सहित राजस्थान के एमएसएमई और स्टार्टअप भी रक्षा क्षेत्र में अपने लिए अवसर तलाशें। ऐसा करके वे देश की आत्मनिर्भरता की यात्रा में सक्रिय सहभागी बन सकते हैं।

केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव संजय जाजू ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में कोटा देश को सबसे काबिल युवा देता है। यदि इन युवाओं को अपनी पढ़ाई के दौरान ही रक्षा क्षेत्र का परिचय मिले तो हम उनमें टेक्नोलॉजी के साथ एंटरप्रेन्योरशिप का माइंड सेट भी तैयार कर सकते हैं। सरकार आज हर तरह से एमएसएमई और स्टार्टअप्स के साथ खड़ी है। उन्हें बढ़ावा देने के लिए कई तरह के उपकरण भारतीय कम्पनियों से खरीदने की शर्त भी रख दी गई है। कोटा के एमएसएमई उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी इस मौके का लाभ लेना चाहिए।

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एसआईडीएम के अध्यक्ष और महिन्द्रा डिफेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीप्रकाश शुक्ला ने कहा कि एक छोटी सी कार बनाने में 200 एमएसएमई का सहयोग चाहिए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि डिफेंस उपकरण बनाने में कितनी एमएसएमई का सहयोग चाहिए। एमएसएमई अपने उत्पाद बेचने के लिए भारी और मध्यम उद्योग पर निर्भर है, लेकिन भारी और माध्यम उद्योग अपने उत्पाद बनाने के लिए एमएसएमई पर निर्भर हैं। कोटा में केमिकल, रेयॉन, फर्टीलाइजर्स क्षेत्र में पहले से काम हो रहा है। अब यहां के उद्यमियों को रक्षा क्षेत्र में काम करने के लिए आगे आना होगा।