Rajasthan- कांग्रेस सरकार और राजभवन के बीच और बढ़ रही तकरार

 
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राजस्थान। काग्रेस सरकार और राजभवन के बीच असामान्य प्रतिक्रिया सामने आई है। सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र को समाप्त करे बिना ही 19 सितंबर को सदन की बेठक बुलवाई गयी है। बजट सत्र  मे 28 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सी.पी.जोशी द्वारा सदन की बैठक अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित कर दी गई थी। पर सरकार के संसदीय कार्य विभाग ने सदन के सत्रावसान की फाइल कि मंजूरी के लिए राजभवन नही भेजी थी। सरकार नही चाहती थी सदन का सत्र बुलाने के लिए फिर राज्यपाल कलराज मिश्रा की मंजूरी ली जाए।

जानकारी के अनुसार राजभवन और अशोक गहलोत सरकार के बीच खींचतान जुलाई, 2020 में पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे की बगावत के समय ही शुरू हो गई थी। यह अब तक जारी है। पायलट खेमे की बगावत के वक्त सीएम गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाकर बहुमत सिद्ध करना चाहते थे। इसके लिए 24 जुलाई, 2020 को सत्र बुलाने का प्रस्ताव भेजा गया। पर राज्यपाल बिना विशेषज्ञो की राय लिए सत्र बुलाने की अनुमति देने को तैयार नही हुए थे। बाद मे गहलोत सरकार ने 25 जुलाई, 2020 को फिर वही प्रस्ताव राजभवन भेजकर 31 जुलाई से सत्र बुलाने का आग्रह किया था।

पर राजभवन ने फिर से आपत्तिया लगाकर सरकार को फाइल वापस भेज दी। आपत्तियो के जवाब सहित सरकार ने 28 जुलाई, 2020 को फिर से प्रस्ताव भेजा था। पर बाद में राज्यपाल ने सत्र बुलाने की मंजूरी दी थी। इस संसदीय कार्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया सरकार बार-बार सत्रावसान कर के राज्यपाल की मंजूरी नही लेना चाहती है। सत्रावसान नही करने के कारण अब अपने स्तर सरकार ने 19 सितंबर से सदन की बेठक बुलाई है। पिछले साल भी सरकार ने बजट सत्र का सत्रावसान न कर सितंबर में फिर बैठक बुलाई थी।

उस समय6 बार प्रस्ताव भेजने के बाद राज्यपाल ने नया सत्र तकनीकी खामिया निकालते हुए नही बुलाया था। सरकार ने विधानसभा में एडवोकेट वेलफेयर फंड अमेंडमेंट विधेयक पारित करने कि मंजूरी के लिए राजभवन भेजा था। पर राजभवन ने वकीलों के विरोध का हवाला देते हुए विधेयक वापस भेज दिया था। बाद मे हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति की योग्यता मे संशोधन का विधेयक राजभवन से वापस सरकार को लौटा दिया गया। राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण संशोधन विधेयक स्वयं सरकार ने वापस मंगवा लिया था। अलग-अलग विश्विघालयों मे कुलपतियो की नियुक्तियो पर भी सरकार और राजभवन के बीच खींचतान हो चुकी है।