CM गहलोत ने बनायें 6 सलाहकार, 3 निर्दलिय, 3 कांग्रेस के जिन्हे मिलेगा मंत्री का दर्जा

 
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जयपुर।  गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल पुनर्गठन के दौरान मंत्री बनने से वंचित रहे छह विधायकों को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया है। इन्हें मंत्री का दर्जा मिलेगा। इनमें तीन निर्दलीय और तीन कांग्रेस विधायक शामिल हैं। कांग्रेस विधायक डॉ. जितेंद्र सिंह, राजकुमार शर्मा, दानिश अबरार, निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा बाबूलाल नागर, रामकेश मीणा को सलाहकार बनाया है। छहों विधायक गहलोत समर्थक हैं। ये सभी विधायक मंत्री बनने के दावेदार थे। सीएम के सलाहकार नियुक्त होने के बाद अब करीब 15 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया जा सकता है। सीएम आज कल में ससंदीय सचिव नियुक्त कर सकते हैं।

जिन छह विधायकों को सलाहकार बनाया है। उनमें पहले सचिन पायलट खेमे में रहे और बगावत के बाद गहलोत खेमे में आए दानिश अबरार का नाम सबसे चर्चा में है। पहली बार विधायक बनने वालों को मंत्री नहीं बनाने का फार्मूला तय हुआ था, लेकिन अब ऐसे विधायकों को सलाहकार बनाकर एडजस्ट किया जा रहा है। जिन तीन निर्दलीय विधायकों को सलाहकार बनाया है। उन्होंने लगातार पायलट कैंप को निशाने पर रखा था।

सीएम के सलाहकार बनाए गए डॉ. जितेंद्र सिंह गहलोत के पिछले कार्यकाल में ऊर्जा मंत्री थे। इस बार भी मंत्री बनने की दोड़ में थे। गुर्जर समाज से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिनती होती है। गुर्जर समाज से महिला विधायक शकुंतला रावत को कैबिनेट मंत्री बना दिया था। इसके बाद वे मंत्री नहीं बन सके।

राजकुमार शर्मा पिछली बार बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए थे। उस वक्त उन्हें चिकित्सा राज्य मंत्री बनाया था। इस बार भी वे दावेदार थे। झुंझुनूं से बृजेंद्र ओला और राजेंद गुढ़ा को सियासी समीकरण साधने के लिए मंत्री बनाना जरूरी था। इसलिए अब इन्हें सलाहकार बनाकर संतुष्ट किया है।

सवाईमाधोपुर से कांग्रेस विधायक दानिश अबरार पहले पायलट खेमे में थे। पिछले साल सियासी संकट में गहलोत खेमे में आए। उस वक्त की वफादारी का अब सियासी इनाम दिया है। अल्पसंख्यक चेहरे के तौर पर भी भागीदारी दी है।

संयम लोढ़ा सिरोही से निर्दलीय जीते और सरकार का समर्थन किया। सियासी संकट के वक्त लोढ़ा ने मुखरता से सीएम गहलोत का पक्ष लिया। लोढ़ा मंत्री बनने के दावेदार थे, लेकिन फॉर्मूले में फिट नहीं बैठे। अब सलाहकार के तौर पर भागीदारी दी है। 

निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा सीएम के नजदिकियो में हैं। पिछली बार बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए थे। तब ससंदीय सचिव थे। इस बार भी गंगापुर से निर्दलीय जीतते ही गहलोत का समर्थन किया था। 

बाबूलाल नागर गहलोत के पिछले राज में खाद्य मंत्री थे। इस बार टिकट कटने के कारण बगावत करके दूदू से निर्दलीय लड़े। नागर शुरू से ही कट्टर गहलोत समर्थक रहे हैं। नागर भी मंत्री बनने के दावेदार थे। अब बदले सियासी समीकरणों में उन्हें सलाहकार बनाया है।