राजस्थान में 11 कैबिनेट और 4 राज्यमंत्री ने ली शपथ,अब होगा विभागों बंटवारा,कईयों के बदलेगें विभाग

 
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जयपुर। राजस्थान के गहलोत मंत्रिमंडल का आखिरकार लंबे इंतजार के बाद रविवार को विस्तार हो गया है। इसमें 11 कैबिनेट और 4 राज्य मंत्री ने शपथ ली। राज्यपाल ने सबसे पहले हेमाराम चौधरी को शपथ दिलाई। हेमाराम ने मई में सरकार से खफ़ा होकर अपने क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। हरीश चौधरी की जगह बाड़मेर से अब हेमाराम को जगह दी गई है। वे पिछली बार भी गहलोत सरकार में राजस्व मंत्री थे। दूसरे नंबर पर महेंद्रजीत सिंह मालवीय और इसके बाद रामलाल जाट ने शपथ ली। रामलाल जाट सीएम के खास माने जाते हैं। शपथ के बाद उन्होंने सीएम के पैर छुए।

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चौथे और पांचवें नंबर पर महेश जोशी, विश्वेंद्र सिंह ने शपथ ली। महेश जोशी को गहलोत का संकटमोचक माना जाता है। फिर क्रमशः रमेश मीणा, ममता भूपेश और आठवें नंबर भजनलाल जाटव ने शपथ ली। भूपेश को राज्य मंत्री से कैबिनेट मंत्री के तौर पर प्रमोट किया गया है। दोनों ने शपथ के बाद सीएम गहलोत के पैर छुए। इसके बाद भजनलाल जाटव, टीकाराम जूली, गोविंद राम मेघवाल, शकुंतला रावत ने शपथ ली। राज्यमंत्री के रूप में सबसे पहले बृजेंद्र सिंह ओला, इसके बाद मुरारीलाल मीणा, राजेंद्र सिंह गुढ़ा और जाहिदा खान ने शपथ ली। जाहिदा ने अंग्रेजी में शपथ ली।

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इससे पहले सीएम अशोक गहलोत ने कांग्रेस विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि जो मंत्री नहीं बन पाए हैं, उनकी भूमिका कम नहीं है। जो बच गए हैं उन्हें एडजस्ट किया जाएगा। जो धैर्य रखता है, उसे कभी न कभी मौका मिलता है। सब तरह से फैसला हुआ है। राजस्थान में बार-बार सरकार में बदलाव आता है, लेकिन इस बार हम सरकार रिपीट करके दिखाएंगे। पूरे कांग्रेसजन एकजुट रहेंगे। जिन्हें मौका मिला है, मैं उम्मीद करता हूं कि वे सोनिया गांधी को निराश नहीं करेंगे।
अजय माकन ने कहा कि 2023 के चुनाव में कई सालों के ट्रेंड को बदलना है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी के लिए काम करता है, पार्टी उसका ध्यान रखती है। अजय माकन ने मंत्री पद छोड़ने वाले तीन नेताओं को बधाई दी।

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प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नए मंत्रियों का स्वागत किया। पीसीसी में सचिन पायलट भी मौजूद रहे। सीएम के पहुंचने के बाद सभी का तिलक लगाकर स्वागत किया। शपथ ग्रहण समारोह के लिए राजभवन में 1500 पुलिसकर्मियों का अमला तैनात किया गया था।

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मंत्रिमंडल फेरबदल में जिन विधायकों जगह नहीं मिली, उन्हें अब संसदीय सचिव और सीएम सलाहकार बनाकर संतुष्ट किया जाएगा। 15 नए संसदीय सचिव और 7 विधायकों को सीएम का एडवाइजर बनाकर मंत्री का दर्जा दिया जाएगा। इनमें बसपा से कांग्रेस में आए 5 विधायक और निर्दलीय विधायकों के साथ कुछ कांग्रेस के विधायक भी शामिल होंगे। नए संसदीय सचिवों को मुख्यमंत्री नियुक्त करेंगे और मुख्यमंत्री के सामने ही उनकी शपथ होगी।

 सभी मंत्रियों के विभागों में आज रात तक बंटवारा होने की संभावना है। कुछ मंत्रियों का विभाग बदलना तय है। वित्त और गृह विभाग मुख्यमंत्री अपने पास ही रख सकते हैं। बीजेपी राज के दौरान भी वित्त विभाग सीएम के पास ही था। गहलोत के पिछले कार्यकाल में वित्त विभाग किसी को नहीं दिया था।