राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा, राजस्थान के कुछ जिलों में युवा लड़कियों को जबरन गलत काम में धकेले जाने के पर्याप्त सबूत

 - इस तरह के दो मामले बाद में बूंदी जिले से दर्ज किए गए।
 
Enough evidence of young girls being forced into wrongdoing in some districts of Rajasthan, says National Commission for Women

नई दिल्ली। राजस्थान के सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा और भरतपुर जैसे कई जिलों में युवा लड़कियों को गलत काम (In many districts of Rajasthan like Sawai Madhopur, Bhilwara and Bharatpur, young girls are forced to do wrong things.) के लिए मजबूर किया जा रहा है। यहां के सर्वे में राष्ट्रीय महिला आयोग की एक टीम (A team from the National Commission for Women) ने पाया है कि इन क्षेत्रों में स्टांप पेपर पर महिलाओं की नीलामी की जा रही थी। महिला आयोग ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि उसने मीडिया में आई उन खबरों पर संज्ञान लिया है जिनमें कहा गया है कि राजस्थान के भीलवाड़ा इलाके में कर्ज चुकाने को लेकर विवाद में कथित तौर पर युवतियों की स्टांप पेपर पर नीलामी कर मामले सुलझाए गए। मामले की जांच के लिए आयोग द्वारा दो सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम (तथ्यान्वेषी दल) का गठन किया गया था। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी स्थिति का जायजा लेने के लिए सवाई माधोपुर का दौरा  कर चुकी है।

क्षेत्र में रहने वाले विभिन्न परिवारों, पुलिस अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के साथ बातचीत के आधार पर महिला आयोग ने निष्कर्ष के बाद सुझाव दिए हैं। इस निष्कर्ष के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि सवाई माधोपुर सहित राजस्थान के कई जिलों में युवा लड़कियों को गलत काम के लिए मजबूर किया जा रहा है। भीलवाड़ा और भरतपुर में राजमार्ग के किनारे सबसे आम स्थान हैं। उन्होंने कहा कि जांच में यह पता चला कि कंजर बस्ती, पंडेर के भीलवाड़ा जिले में परिवार का पंजीकरण, जिन्हें अद्यतन किया जाना था, वहां रहने वाले परिवारों के बारे में महत्वपूर्ण विवरणों में कमी थी। रिकार्ड में शादी करने वाली या किसी दूर के रिश्तेदार के साथ रहने वाली लड़कियों की पहचान नहीं थी।

टीम ने पाया कि समुदायों का दौरा इस बात का और सबूत देता है कि राज्य में बाल विवाह अभी भी आम बात है। मीडिया में कवर की गई घटना ऐसे कई मामलों में से एक है। इसी तरह के दो मामले बाद में बूंदी जिले से दर्ज किए गए थे। हालांकि, जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से इनकार कर रही है और इस मुद्दे को हल करने में विफल रही है। टीम ने कहा कि पंचायत और स्थानीय सरकार की धमकियों के कारण लोगों पर बाल स्तर पर गलत काम और तस्करी की वास्तविक सीमा को छिपाने का दबाव है। एनसीडब्ल्यू की टीम ने परिवारों से बातचीत के दौरान यह भी पाया कि हर परिवार में छह से नौ नाबालिग लड़कियां एक ही छत के नीचे रहती थीं। ये लड़कियां परिवार में एक-दूसरे के साथ अपने रिश्ते को बताने में असमर्थ थीं।

उन्होंने सुझाव दिया कि संबंध स्थापित करने के लिए युवा लड़कियों और उनके संबंधित परिवारों पर डीएनए परीक्षण किया जाना चाहिए। जबरन गलत काम के लिए मजबूर की गईं नाबालिग लड़कियों को बचाना और उनका उचित पुनर्वास किया जाना महत्वपूर्ण है। राजस्थान में यौन शोषण, गलत काम आदि के लिए महिलाओं और लड़कियों की तस्करी के लिए एक स्रोत और गंतव्य दोनों एक जैसे लगते हैं। जनता को इन मुद्दों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए और अधिकारियों को संवेदनशील होना चाहिए।

महिला आयोग ने कहा है कि राजस्थान सरकार को सलाह दी जा सकती है कि वह राज्य में जन्म लेने वाली प्रत्येक बच्ची का ट्रैक रिकार्ड रखे। इस बीच महिला आयोग की टीम ने केंद्र को जांच करने के लिए एक एसआईटी गठित करने की सलाह दी है और प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे मुद्दों से निपटने में सक्रिय होना चाहिए। महिला अधिकार निकाय ने सुझाव दिया कि आर्थिक आजीविका गतिविधियों, लड़कियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से संबंधित जागरूकता कार्यक्रमों को उनकी स्थिति में सुधार के लिए केंद्रित किया जाना चाहिए।