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काश! कुछ देर मंदिर में रुक जाते, स्वर्णकार परिवार के 3 सदस्यों कि मौत, 2 गंभीर घायल

काश! कुछ देर मंदिर में रुक जाते, स्वर्णकार परिवार के 3 सदस्यों कि मौत, 2 गंभीर घायल

जोधपुर। स्वर्णकार समाज के अध्यक्ष और पूर्व न्यासी रामेश्वर जसमतिया का परिवार हर महीने सालासर बालाजी के फेरी लगाने जाता था। रामेश्वर की पत्नी आनंदकौर अपनी तीनों बेटियां सुमन, दीपिका व शिल्पी के अलावा अपने बेटे विकास, उसकी पत्नी व नाती-पोतों के साथ रविवार को सुबह तीन गाड़ियों में सवार होकर फेरी देने निकले। रामेश्वर व उनके दो दामाद प्रमोद व सत्यप्रकाश ने बीच रास्ते माताजी के मंदिर में धोक देने के बाद ठंडा भोजन किया।

इसके कुछ देर बाद ही सालासर बालाजी जाते हुए फतेहपुर-लाडनूं बायपास स्थित बोबासर गांव के नजदीक सामने से आ रही बस ने कार को चपेट में ले लिया और हादसा हो गया। कार कुलदीप चला रहे थे। रास्ते में एनएच 58 पर लाडनूं की तरफ से सालासर जाते समय ओवरब्रिज के नीचे उतरते ही सालासर की तरफ से आ रही बस की कार से आमने-सामने भीषण टक्कर हो गई। कार का अगला हिस्सा बस के नीचे घुस गया। जिसे क्रेन की सहायता से बाहर निकाला गया। शव कार में बुरी तरह फंस गए। कुलदीप का शव निकालने के लिए तो कार को लोहे की रॉड व हथौड़े से काटना पड़ा। बस में भी एक परिवार सवार था, जो आबसर से भात भरकर लौट रहा था।

इस हादसे में रामेश्वर की पत्नी आनंदकौर, सबसे छोटी बेटी शिल्पी व उसके पति कुलदीप की मौत हो गई, जबकि सबसे बड़ी बेटी सुमन व उससे छोटी दीपिका को गंभीर हालत में जोधपुर के एम्स में लाया। यहां सुमन की स्थित गंभीर बनी हुई है।

रामेश्वर जसमतिया ने 35 दिन पहले ही केएन काॅलेज के सामने स्थित काॅलोनी के घर में ही ज्वैलरी का शोरूम खोला था, तब पूरा परिवार एकत्रित हुआ। मंदिर में भोजन करने के पहले तीनों अलग-अलग गाड़ियों में सवार थे, लेकिन भोजन कर रवाना होने के साथ ही आनंदकौर पुत्री शिल्पी के साथ उसके पति कुलदीप की कार में सवार हो गए। परिवार को इस बात का ही गम सता रहा है कि माताजी के मंदिर में भोजन करने के बाद कुछ देर और रुक जाते तो शायद हादसा टल जाता।

रात्रि में जब तीनों के शव जोधपुर पहुंचे तो परिवार के सदस्यों सहित स्वर्णकार समाज के लोगों की आंखें नम हो गईं। शिल्पी व कुलदीप के शव मसूरिया रवाना किए गए। तीनों का अंतिम संस्कार सोमवार सुबह सिवांची गेट श्मशान घाट पर होगा।

नागौर में कुंजल माता मंदिर के पास परिवार खाने के लिए रूका। यहां से रवाना होने से पहले शिल्पी के दोनों बच्चे अपने मामा विकास की गाड़ी में दूसरे बच्चों के साथ बैठ गए थे। गनीमत रही कि वे सकुशल बच गए। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनो को सोप दिए।

Written by CITY NEWS

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